4. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव


चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएँ


1. चुम्बकीय क्षेत्र-रेखाओं के किन्हीं दो गुणों को लिखें।

उत्तर- चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण :

(i) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक दूसरे को परिच्छेद नहीं करती हैं।

(ii) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ जहाँ काफी सघन होती हैंवहाँ का क्षेत्र काफी प्रबल होता है।


2. विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव को दिखाने हेतु एक प्रयोग का वर्णन करें।

उत्तर- हम जानते है कि जब किसी चालक तार से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो तार के करीब चुम्बकीय गुण उत्पन्न होता है। इस क्रिया को चुम्बकीय प्रभाव कहते है।

प्रयोग : माना कि XY एक तार है जिससे विद्युत धारा प्रवाहित किया गया है एक सूचक लेते है। और तार के करीब रखते है।

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तो हम देखते है कि दिक् सूचक सूई की स्थिति में परिवर्तन हो जाता है। जो विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभावं को दर्शाता है।


3. चुंबकीय बल रेखाओं को देखकर क्या निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं?

उत्तर- चुंबकीय बल रेखाओं के देखने पर पता चलता है कि चुंबक के दोनों ध्रुवों के पास बल रेखाएँ काफी समीप (सघन) हैं अर्थात् ध्रुवों पर चुंबकीय बल अधिक है। बल रेखाओं के अन्य भागों पर बल रेखाएँ दूरस्थ हैं अतः इन क्षेत्रों में चुंबकीय बल अपेक्षाकृत कम है।

बल रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं। अगर दो क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काटेंगी तो वहाँ क्षेत्र की दो दिशाएँ होंगी जो असंभव है।


4. चुंबकत्व की असली पहचान क्या है?

उत्तर- चुंबक में सजातीय ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण और विजातीय ध्रुवों के बीच आकर्षण उत्पन्न होता है। प्रतिकर्षण ही चुंबक की असली पहचान है।

दो लोहे के टुकड़े लिए जाएं और इनके एक छोर दूसरे के दूसरे छोर से सटाने पर अगर प्रतिकर्षण होता है तो दोनों लोहे के टुकड़े चुंबक होंगे।


5. चुंबक के निकट लाने पर दिक् सूचक की सूई विक्षेपित क्यों हो जाती है?

उत्तर- दिक् सूचक सूई भी एक छोटा चुंबक है जिसमें ध्रुव और ध्रुव मौजूद है। जब चुंबक के समीप इसे लाया जाता है तो इनके ध्रुवों के बीच आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण के कारण चुंबकीय सूई विक्षेपित हो जाती है।


6. विद्युत चुंबक की विशेषताओं को लिखें।

उत्तर- (i) विद्युत चुंबक का चुंबकत्व स्थायी नहीं होता है। जबतक धारा बहती है चुंबकत्व कायम रहता है और धारा के बंद होने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।

(ii) विद्युत चुंबक के एक छोर पर उत्तरी ध्रुव और दूसरे छोर पर दक्षिणी ध्रुव पैदा हो जाते हैं। धारा की दिशा उलटने पर ध्रुवों की स्थिति बदल जाती है।

(iii) विद्युत चुंबक के चुंबकत्व की तीव्रता परिनालिका में फेरों की संख्याधारा के मान तथा क्रोड की प्रकृति पर निर्भर करता है।


7. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के संबंध में क्या जानते हैं?

उत्तर- पृथ्वी एक विशाल चुंबक की भाँति कार्य करता है। इसका उत्तरी ध्रुव भौगोलिक दक्षिण की ओर दक्षिण ध्रुव भौगोलिक उत्तर की ओर स्थित है।

पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का अक्ष और भौगोलिक अक्ष के बीच का कोण 19° होता है।


8. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को परिच्छेद क्यों नहीं करती हैं?

उत्तर- अगर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को परिच्छेद करती हैं तो क्षेत्र के किसी बिंदु विशेष पर दिक् सूची दो दिशाओं को इंगित करेगा जो असंभव है। यही कारण है कि दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को परिच्छेद नहीं करती हैं।


9. किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय बल रेखा दिखावें।

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चित्र में चुंबकीय बल रेखाओं को दिखाया गया है।


10. विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक में अंतर बतावें।

उत्तर- नरम लोहे के क्रोड पर धारावाही कुंडली लपेट कर धारा प्रवाहित की जाये तो यह विद्युत चुंबक बन जाता है। इसका चुंबकत्त्व तभी तक रहता है जब तक कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती रहती है। कार्बन स्टील के छड़ को धारावाही कुंडली के गर्भ में रख दिया जाये तो कुछ देर बाद यह चुंबक बन जाता है। अव धारा का बहना बंद कर दिया जाता है तब भी यह छड़ अपने चुंबकत्त्व का त्याग नहीं करता है। यह स्थायी चुंबक कहलाता है।


11. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या होती हैंकिसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कैसे निर्धारित की जाती हैचुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के दो प्रमुख गुणधर्म लिखें।

उत्तर- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँचुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और परिमाण को दर्शाता है। किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा एक चुंबक के उत्तरी ध्रुव को उस बिंदु पर रखने पर उसकी दिशा के समकक्ष होती है।

चुंबकीय बल रेखाओं के निम्नांकित गुणधर्म हैं:

(i) चुंबकीय बल रेखाएँ एक दूसरे को नहीं काटती हैं।

(ii) बल रेखाओं की संख्या अधिक होने पर चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति काफी बढ़ जाती है।



किसी विद्युत धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र


12. किसी क्षैतिज शक्ति संचरण लाइन (पावर लाइन) में पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। इसके ठीक नीचे के किसी बिंदु पर तथा इसके ठीक ऊपर के किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी?

उत्तर- विद्युत धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। दक्षिण हस्त अंगूष्ठ नियम को लागू करने पर हमें तार के नीचे किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा उत्तर से दक्षिण की ओर प्राप्त होती है। तार से ठीक ऊपर के किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होगी।


13. यदि ताम्बे के तार में प्रवाहित विद्युत धारा पूर्ववत् हैपरन्तु दिक् सूचक तांबे के तार से दूर चला जाता है तब दिक् सूची के विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर- चुंबकीय बल दूरी के सीधा समानुपाती होता है। चालक तार से दिक् सूची की दूरी जैसे-जैसे बढ़ती है इसके सूई में विक्षेप वैसे-वैसे घटता जाता है। इसका अर्थ है कि दूर जाने पर विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता घटती है। विद्युत धारावाही सीधे चालक तार दूर हटते जाते हैं तो उसके चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र को निरूपित करने वाले सकेंद्री वृत्तों का साइज भी बड़ा हो जाता है।


14. किसी सीधे तार से बहने वाली धारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय बल-रेखा की दिशा को बताने वाले नियम को लिखें।

उत्तर- दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम- यदि किसी धारावाही तार को अपने हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा धारा की दिशा में तना रहेतो उँगलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र-रेखाओं की दिशा में लिपटी होगी।

जैसा कि चित्र में दिया गया है-

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15. परिनालिका का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर-

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16. परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर इसका कौन सिरा उत्तरी ध्रुव और कौन सिरा दक्षिणी ध्रुव जैसा बर्ताव करती हैसमझावें।

उत्तर- परिनालिका के जिस सिरे को देखने पर विद्युत धारा सूई के घूमने की दिशा में हो वह सिरा दक्षिणी ध्रुव और धारा वामावर्त हो तो वह सिरा उत्तरी ध्रुव जैसा व्यवहार करता है।

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17. विद्युत चुंबक के चुंबकत्व की तीव्रता किन-किन बातों पर निर्भर करता है?

उत्तर- विद्युत चुंबक के चुंबकत्त्व की तीव्रता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-

(i) परिनालिका के फेरों की संख्या- फेरों की संख्या (N) बढ़ने से चुंबकत्त्व की तीव्रता (B) समानुपाती ढंग से बढ़ती है। अर्थात image 

(ii) धारा का मान- धारा का मान (Iबढ़ने पर चंबकत्व की तीवता (B) समानुपाती ढंग से बढ़ती है। अर्थात् image

(iii) क्रोड की प्रकृति पर- परिनालिका के अंदर नरम लोहे का व्यवहार करने पर अधिक शक्तिशाली चुंबक बनता है। लेकिन इस्पात के व्यवहार करने पर कम शक्तिशाली चुंबक बनता है।


18. परिनालिका की सहायता से स्थायी चुंबक कैसे बनता है?

उत्तर- जब एक स्टील के छड़ को कुंडली के गर्भ में रख दी जाती है और विद्युत धारा प्रवाहित किया जाता हैतो स्टील का छड़ स्थायी चुंबक बन जाता है। इसे विद्युत चुंबक कहा जाता है।

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चुंबकीय क्षेत्र में किसी विद्युत धारावाही चालक पर बल


19. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम को लिखें।

उत्तर- फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम- अपने बायें हाथ की तर्जनीमध्यमाव अंगूठे को परस्पर लंबवत् फैलाइये। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा तथा मध्यमा धारा की दिशा प्रदर्शित करेतो चालक की गति की दिशा अंगूठे की दिशा में होगी।

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विद्युत मोटर


20. प्रत्यावर्ती धारा में कौन-सी दो कमियाँ होती हैं?

उत्तर- प्रत्यावर्ती धारा से निम्नलिखित दो कमियाँ हैं-

(i) प्रत्यावर्ती धारा से विद्युत लेपन तथा बैटरियों का आवेशन नहीं किया जा सकता है।

(ii) इस धारा से विद्युत विच्छेदन नहीं किया जा सकता है।


21. विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है?

उत्तर- विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक् परिवर्तक का कार्य करता है।


22. विद्युत् मोटर का क्या सिद्धांत है?

उत्तर- विद्युत मोटर का सिद्धांत- विद्युत मोटर में विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरित किया जाता है।


23. दिष्ट धारा के कुछ स्त्रोतों के नाम लिखें।

उत्तर- बैटरी और विद्युत मोटर।


24. विद्युत मोटर के कुछ उपयोगों को लिखें।

उत्तर- विद्युत मोटर के उपयोग निम्नांकित हैं- 

(i) विद्युत पंखों में,

(ii) रेफ्रिजरेटरों में

(iii) विद्युत मिश्रकों में

(iv) वाशिंग मशीनों में 

(v) MP3 प्लेयरों में।


25. विद्युत बल्ब में निष्क्रिय गैस क्यों भरी जाती है?

उत्तर- बल्ब के अंदर टंगस्टन का तार रहता है। इस तार का बना कुंडली बल्ब के अन्दर उत्पन्न ताप के कारण प्रकाश देता है। अगर बल्ब में ऑक्सीजन की उपस्थिति होगी तो कुण्डली आक्सीकृत होकर जल जायेगा और बल्ब फ्यूज कर जायेगा। यही कारण है कि बल्य के अन्दर निष्क्रिय गैसें imageआदि भरी जाती हैं ताकि बल्ब पयूज नहीं हो सके।



वैद्युतचुंबकीय प्रेरण


26. एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में एक चालक लूप को घूर्णित करने पर किस प्रकार की धारा चलेगी?

उत्तर- जब एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में एक चालक लूप को धूर्णित करने परउसमें प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न होती है।


27. फ्लेमिंग के दाएँ हाथ का नियम लिखें।

उत्तर- "अपनी दाहिने हाथ की तर्जनी मध्यमा तथा अंगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक दूसरे के परस्पर लम्बवत् हो। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर संकेत करती है तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा के ओर संकेत करता है तो मध्यमा चालक में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा दर्शाती है।"


28. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव से संबंधित 'दक्षिण हस्त-अंगूठाके नियम को लिखें।

उत्तर- दक्षिण-हस्त अंगूठा का नियम- जब दाहिने हाथ तर्जनी अंगुली मध्यमिका अंगुली और अंगूठा इस प्रकार फैलाकर रखा जाता है कि तीन अंगुलियाँ एक दूसरे के साथ लम्बवत् होअगर तर्जनी अंगुली चुंबकीय बल की दिशा की ओरअंगूठा चुंबक की गति की दिशा की ओर इंगित करे तो मध्यमिका अंगुली प्रेरित धारा की दिशा को इंगित करेगा।


29. कोई विद्युतरोधी ताँबे की तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबक

(i) कुंडली में ढकेला जाता है?

(ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है?

(iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है।

उत्तर-(i) गैल्वेनोमीटर के सूई में विक्षेप होता है।

(ii) सूई में विक्षेप (i) की अपेक्षा विपरीत दिशा में होता है।

(iii) सूई में कोई विक्षेप नहीं होता है।


30. दो वृत्ताकार कुंडली तथा एक दूसरे के निकट स्थित है। यदि कुंडली A में विद्युत धारा में कोई परिवर्तन करे तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत धारा प्रेरित होगीकारण लिखिए। 

उत्तर- जब कुंडली में विद्युत धारा में परिवर्तन किया जाता है तो कुंडली B में विद्युत धारा प्रेरित हो जाती है। इसका कारण यह है कि चुंबकीय बल रेखाओं में परिवर्तन हो जाता है। कुंडली के समीप कुंडली के होने के कारण परस्पर प्रेरण की घटना होती है। इसी घटना के कारण में विद्युत धारा प्रेरित होती है।


31. ताँबे के तार की कुंडलीधारामापी के साथ संबद्ध है। क्या होगा यदि दण्ड चुंबक को-

(i) कुंडली के अंदर चुंबक के उत्तर ध्रुव को पहले प्रविष्ट किया जाय?

(ii) कुंडली से चुंबक को बाहर निकाला जाय?

(III) कुंडली के अंदर चुंबक को स्थिर रखा जाय?

उत्तर-(i) जब कुंडली के उत्तरी ध्रुव को तेजी से कुंडली के गर्भ में प्रवेश कराया जाता हैतो कुंडली से सम्बद्ध गैलवेनोमीटर की सूई में विचलन उत्पन्न होता है। कुंडली में धारा की दिशाघड़ी की विपरीत दिशा में होती है।

(ii) जब चुंबक को कुंडली से बाहर तेजी से निकाला जाय तो गैलवेनोमीटर की सूई में विचलन विपरीत दिशा में होगी।

(iii) अगर चुंबक कुंडली के अन्दर स्थिर होतो गैलवेनोमीटर की सूई में कोई विचलन उत्पन्न नहीं होता है। अर्थात् कुंडली से होकर कोई धारा नहीं बहती है।


32. 2 kW शक्ति अनुमतांक एक विद्युत तंदूर किसी घरेलू विद्युत परिपथ (220 V) में प्रचालित किया जाता है जिसका विद्युत धारा अनुमतांक 5 A है। इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैंस्पष्ट कीजिए।

उत्तरP = 2 kW = 2000 W, V = 220 V, 

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विद्युत धारा का प्रवाह 5A से अधिक है

अतः फ्यूज गल जायेगा और विद्युत तंदुर नष्ट होने से बच जायेगा।


33. परिनालिका चुंबक की भाँति कैसे व्यवहार करती हैक्या आप किसी छड़ चुंबक की सहायता से किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं?

उत्तर- जब परिनालिका से विद्युत धारा प्रवाहित किया जाता है तो यह चुंबक की भाँति व्यवहार करता है। परिनालिका के ध्रुव का निर्धारण करने के लिए एक पीतल की हुक की सहायता से इसे स्वतंत्रपूर्वक लटकाया जाता है। एक छड़ चुंबक के उत्तरी ध्रुव को परिनालिका के एक सिरे के पास ले जाया जाता है। अगर आकर्षण होता है तो स्पष्टतः परिनालिका का यह सिरा दक्षिण ध्रुव है। अगर प्रतिकर्षण होता है तो यह सिरा उत्तर ध्रुव होगा। जब एक सिरे के ध्रुव की जानकारी हो जाती हैतो दूसरा ध्रुव आसानी से ज्ञात हो जायेगा।



विद्युत जनित्र


34. प्रत्यावर्ती धारा एवं दिष्ट धारा में अंतर बताएँ।

उत्तर- प्रत्यावर्ती धारा और दिष्ट धारा में अन्तर इस प्रकार है-

प्रत्यावर्ती धारा (ए०सी०)

(i) धारा का मान तथा दिशा समय के साथ बदल जाते हैं।

(ii) इसे आसानी से उत्पन्न किया जा सकता है।

(iii) इसे सुगमतापूर्वक डी०सी० में रूपान्तरित किया जा सकता है।

(iv) यह डी०सी० की अपेक्षा अधिक घातक होता है।

(v) यह चालक के ऊपरी सतह पर प्रवाहित होता है।

दिष्ट धारा (डी०सी०)

(i) केवल दिष्ट धारा का परिमाण बदलता है।

(ii) इसे उत्पन्न करने में कठिनाई है।

(iii) इसे ए०सी० में बदलने में काफी कठिनाई होती है।

(iv) यह ए०सी० की अपेक्षा कम घातक होता है।

(v) यह चालक के भीतरी भाग से प्रवाहित होता है।


35. विद्युत जनित्र के सिद्धांत क्या हैं?

उत्तर- विद्युत जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में रखे किसी चालक को घूर्णी गति प्रदान करने में किया जाता है। इसी कारण विद्युत धारा उत्पन्न होती है। अतः विद्युत जनित्र में यात्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।


36. धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कित करना क्यों आवश्यक है?

उत्तर- धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कित करना इसलिए आवश्यक है कि ऐसा करने पर इस धातु के आवरण का विभव शून्य रहता है और विद्युत साधित्रों को छुने पर झटका नहीं लगता है।



घरेलू विद्युत परिपथ


37. 'लघुपथनसे आप क्या समझते हैं?

उत्तर- कभी-कभी विद्युत परिपथ में गर्म तार और ठंढे तार आपस में सट जाते हैं। जिससे परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है तथा परिपथ में विद्युत धारा की प्रबलता काफी बढ़ जाती है। परिणाम यह होता है कि परिपथ से जुड़े उपकरण काफी गर्म होकर नष्ट हो जाते हैं। परिपथ में इस प्रकार की घटना को लघुपथन कहते हैं।


38. विद्युत परिपच में फ्यूज तार क्यों लगाए जाते हैं?

उत्तर- घर में लगे साधित्रों की सुरक्षा के लिए फ्यूज तार लगाया जाता है। यह उच्च विद्युत धारा के कारण तार गल कर परिपथ को भंग करता है और साचित्रों (रेडियोटीवीबल्ब आदि) को जलने से बचाता है।


39. विद्युत फ्यूज क्या हैयह किस मिश्र धातु का बना होता है?

उत्तर- विद्युत परिपधों के लिए फ्यूज तार का उपयोग होता है। यह अतिभारण अथवा लघुपधन के कारण उत्पन्न उच्च विद्युत धारा के बहने पर यह गल जाता है तथा सुरक्षा प्रदान करता है। फ्यूज तार ताँबे तथा दिन के मिश्रधातु से बना होता है।



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