| 3. विद्युत |
विद्युत धारा और परिपथ
1. एम्पियर की परिभाषा दें।
उत्तर- विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं। अगर t सेकेण्ड में Q आवेश किसी चालक से प्रवाहित होती है। धारा होगा।
अगर प्रति सेकेण्ड 1 कूलॉम आवेश चालक से प्रवाहित हो तो विद्युत धारा 1 एम्पियर होगी।
2. विद्युत धारा की दिशा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- परिपाटी के अनुसार किसी विद्युत परिपथ में इलेक्ट्रॉनों जो ऋणावेशित हैं के प्रवाह की दिशा के विपरीत दिशा को विद्युत धारा की दिशा मानी जाती है।
3. विद्युत धारा के तीन व्यवहारिक उपयोगों को लिखें।
उत्तर- विद्युत के तीन व्यवहारिक उपयोग-
(i) विद्युत हीटर में
(ii) विद्युत केतली में
(iii) विद्युत बल्ब में।
4. सूखे बालों में कंघी करने से बाल-खड़े हो जाते हैं या कंघी के साथ कागज के कतरन आकृष्ट कर लिए जाते हैं। क्यों?
उत्तर- कचकड़े की कंघी से बाल को रगड़ने पर बाल तथा कंघी पर विपरीत आवेश उत्पन्न हो जाते हैं। अतः कंघी कागज के कतरन को आकर्षित करता है और आवेश के कारण बाल खड़े हो जाते हैं।
5. क्या आप जानते हैं कि किसी इलेक्ट्रॉन का आवेश कितने कूलॉम के तुल्य होता है? एक कूलॉम आवेश कितने इलेक्ट्रॉनों के आवेश के तुल्य होता है?
उत्तर- एक इलेक्ट्रॉन
1 कूलॉम आवेश
इलेक्ट्रॉन के आवेश के बराबर है।
6. किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचें जिसमें 2V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5𝞨 प्रतिरोधक, एक 8𝞨 प्रतिरोधक तथा एक 12𝞨 प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजीं सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
उत्तर- चित्र में एक विद्युत परिपथ दिखाया गया है जिसमें 3 सेल दो-दो वोल्ट, एक प्लग कुंजी K तथा तीन प्रतिरोधक 5𝞨, 8𝞨 और 12𝞨 के हैं, जो श्रेणी क्रम में संयोजित हैं।
7. विद्युत धारा की प्रबलता की परिभाषा दें।
उत्तर- किसी चालक तार से प्रति सेकेण्ड बहने वाली आवेश को विद्युत धारा की प्रबलता कही जाती है।
या,
8. एक वोल्ट की परिभाषा दें।
उत्तर- यदि किसी विद्युत धारावाही चालक के दो बिंदुओं के बीच एक कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है तो उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट होता है।
9. विद्युत आवेश क्या है? विद्युत आवेश कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर- विद्युत आवेश- आवेश कुछ मौलिक कणों का अकाट्य गुण है जिसके कारण आवेशित कण आपस में बल लगाते हैं। अगर ऊन द्वारा एबोनाइट के छड़ को रगड़ा जाए तो ऊन पर धन आवेश और एबोनाइट पर ऋण आवेश मुक्त होते हैं। आवेश दो प्रकार के होते हैं- धन आवेश और ऋण आवेश।
10. विद्युत परिपथ में फ्यूज तार का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर- घर में लगे साधित्रों की सुरक्षा के लिए फ्यूज तार लगाया जाता है। यह उच्च विद्युत धारा के कारण तार गल कर परिपथ को भंग करता है और साधित्रों (रेडियो, टीवी, बल्ब आदि) को जलने से बचाता है।
विद्युत विभव और विभवान्तर
11. विद्युत विभव को परिभाषित करें एवं इसका S.I. मात्रक लिखें।
उत्तर- किसी बिन्दु P का विभव इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिन्दु तक लाने में बाह्य कर्त्ता द्वारा किया गया कार्य है।
विभव का SI पद्धति में मात्रक है जिसे वोल्ट कहा जाता है।
12. विद्युत विभव और विभवांतर में क्या अंतर है?
उत्तर- विद्युत विभव- इकाई धन आवेश को अनंत से विद्युतीय क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में सम्पादित कार्य को उस बिंदु पर का विभव कहते हैं। इसका S.I. मात्रक वोल्ट है।
विभवांतर - दो बिंदुओं के बीच के विभवों के अंतर को विभवांतर कहते हैं। इसका भी S.I. मात्रक वोल्ट है।
13. यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट है?
उत्तर- यदि किसी विद्युत धारावाही चालक के दो बिंदुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है तो उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट होता है।
14. दो बिंदुओं के बीच के विभवांतर ज्ञात करने के लिए एक व्यजंक लिखें।
उत्तर-
15. उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर बनाए रखने में सहायता करती है।
उत्तर- किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने के लिए सेल अपनी संचित रासायनिक ऊर्जा नियमित रूप से खर्च करता है जिससे विद्युत धारा निश्चित रहती है और चालकों के सिरों के बीच विभवांतर बना रहता है। यह परिवर्ती प्रतिरोध द्वारा सम्पन्न होती है।
विद्युत परिपथ आरेख
16. विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है?
उत्तर - आवेश में एक विद्युत प्रवाह के लिए बने बंद रास्ते को विद्युत परिपथ कहा जाता है
चित्र में एक विद्युत परिपथ दिखाया गया है।
17. ऐमीटर और वोल्टमीटर की विद्युत परपिथ के साथ क्रमशः श्रेणीक्रम एवं समांतरक्रम में क्यों जोड़ा जाता है?
उत्तर- ऐमीटर धारा मापने की एक युक्ति है। अतः, इसे विद्युत परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है ताकि कुल धारा इससे होकर प्रवाहित हो। इसका प्रतिरोध बहुत कम होने के कारण प्रवाहित धारा का परिमापण नहीं बदलता है।
वोल्टमीटर विद्युत परिपथ में किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने की युक्ति है। अतः, इसे उन दो बिंदुओं के समांतरक्रम में जोड़ा जाता है। इसका प्रतिरोध बहुत अधिक होने के कारण यह परिपथ से नगण्य धारा लेता है।
ओम के नियम
18. ओम के नियम में कौन-सी राशि अचर रहती है जब तापक्रम नियत रहे? व्याख्या करें।
उत्तर- ओम के नियम में जब तापक्रम नियत रहता है तब चालक का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल तथा लम्बाई नियत रहता है।
अर्थात्
19. प्रतिरोध क्या है? इसका सूत्र एवं मात्रक लिखें।
उत्तर - परिपथ में विद्युत धारा कम करने वाले रूकावट को प्रतिरोध कहा जाता है।
ओम के नियम से,
यदि किसी चालक के दोनों सिरों के बीच विभवांतर 1 वोल्ट हो और उससे 1 एम्पियर की विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो चालक प्रतिरोध 1 ओम होगा।
20. ओम के नियम को लिखें।
उत्तर- ओम के नियम- अचर ताप पर किसी चालक में बहने वाली विद्युतधारा की प्रबलता चालक के बीच उत्पन्न विभवान्तर के समानुपाती होती है।
अगर चालक से I विद्युत धारा बहती है और चालक के दोनों छोरों के बीच का विभवान्तर V है तो ओम के नियम से, जहाँ ताप नियत है।
जहाँ R एक स्थिरांक है। इसे चालक का प्रतिरोध कहा जाता है।
वह कारक जिन पर किसी चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है
21. किसी तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल से कैसे प्रभावित होता है?
उत्तर- किसी चालक तार की प्रतिरोधकता तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अगर अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल बढ़ा दी जाती है तो तार की प्रतिरोधकता घट जाती है और अगर तार काफी पतला हो तो चालक तार की प्रतिरोधकता बढ़ जाती है।
22. प्रतिरोध की उत्पत्ति का कारण क्या है?
उत्तर- जब तार में तथा सेल के अंदर इलेक्ट्रॉन का प्रवाह बिना रूकावट के नहीं होता है। अर्थात् आवेशित कणों के बीच टक्कर के कारण रूकावट उत्पन्न होता है। अतः परिपथ में धारा को कम करने वाले रूकावट के गुण को प्रतिरोध कहा जाता है। इसी कारण से प्रतिरोध उत्पन्न होता है।
23. किसी चालक का प्रतिरोध किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर- चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-
(i) चालक की लंबाई
(ii) चालक के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल
(iii) चालक की प्रकृति पर।
24. विद्युत प्रतिरोधकता क्या है तथा इसका S.I. मात्रक लिखें।
उत्तर- विद्युत प्रतिरोधकता किसी पदार्थ की अभिलाक्षणिक गुण है। धातुओं और मिश्रधातुओं के विद्युत प्रतिरोधकता अत्यंत कम होती है।
विद्युत प्रतिरोधकता का S.I मात्रक ओम मीटर (𝞨-m) है।
25. किसी तार का प्रतिरोध उनकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर- किसी चालक तार की प्रतिरोधकता तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अगर अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल बढ़ा दी जाती है तो तार की प्रतिरोधकता घट जाती है और अगर तार काफी पतला हो तो चालक तार की प्रतिरोधकता बढ़ जाती है।
26. विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर- टंगस्टन का गलनांक (3380°C) उच्च है। यह उच्च ताप से गलता है और गर्म होकर प्रकाश उत्सर्जित करता है। अन्य धातुओं के तार का गलनांक इसकी तुलना में कम है। ऐसी अवस्था में बिजली बल्ब में टंगस्टन का उपयोग होता है।
27. घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?
उत्तर- घरों में बल्ब, पंखे अन्य विद्युत उपकरण पार्श्वक्रम में संयोजित रहते हैं। सभी उपकरणों के दोनों छोरों के बीच विभवांतर समान रहता है। एक के फ्यूज करने पर दूसरे में धारा का प्रवाह बंद नहीं होता है।
उपकरणों के परिपथ में श्रेणी बद्ध जोड़ने पर हरेक उपकरणों में कम विभवांतर का संचार होने लगता है। एक बल्ब अगर फ्यूज कर जाए तो परिपथ में धारा का बहना बंद हो जायेगा। यही कारण है कि घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणी बद्ध संयोजन का उपयोग नहीं किया जाता है।
प्रतिरोधों के निकाय का प्रतिरोध
28. प्रतिरोधों का समूहीकरण क्या है? विद्युत परिपथ के साथ वर्णन करें।
उत्तर- विद्युत परिपथ में प्रतिरोधों को दो प्रकार से संयोजित किया जाता है- श्रेणीबद्ध संयोजन और पार्श्वबद्ध संयोजन।
विद्युत परिपथ में प्रतिरोध श्रेणीबद्ध संयोजित है जबकि
और
प्रतिरोध पार्श्व बद्ध संयोजित है। अतः विद्युत परिपथ में प्रतिरोधों के क्रमबद्ध संयोजन को ही प्रतिरोधों का समूहीकरण कहा जाता है।
29. प्रतिवर्ती प्रतिरोध क्या है?
उत्तर- स्त्रोत की बोल्टता में बिना कोई परिवर्तन किए परिपथ की धारा को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अवयव को परिवर्ती प्रतिरोध कहते हैं।
30. विद्युत संचरण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमीनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर- कॉपर तथा ऐलुमिनियम तारों का उपयोग इसलिए किया जाता है कि इनकी विद्युत प्रतिरोधकता अन्य तारों की अपेक्षा काफी कम होती है। कॉपर की प्रतिरोध कता 1.62𝞨 मीटर और ऐलुमीनियम की प्रतिरोधकता 2.63𝞨 मीटर है। साथ ही, अन्य धातुओं की तुलना में यह आसानी से उपलब्ध होता है। अधिक महँगे भी नहीं होते हैं।
विद्युत धारा के तापीय प्रभाव
31. विद्युत बल्ब का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर-
32. तप्त तार एवं फ्यूज तार में क्या अन्तर है?
उत्तर- तप्त तार - उच्च गलन बिन्दु (High melting point)
फ्यूज तार- निम्न गलन बिन्दु (Low melting point)
33. किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव तप्त हो जाता है?
उत्तर- विद्युत हीटर में तापन अवयव मिश्रधातु का होता है। इसका गलनांक शुद्ध धातु की तुलना में अधिक है। अतः तापन अवयव की प्रतिरोधकता काफी ज्यादा होती है जिससे तापन अवयव गर्म होकर ठंडा पानी या कमरे के ताप में वृद्धि कर देता है। विद्युत हीटर के तार की प्रतिरोधकता काफी कम होती है जिससे डोरी गर्म नहीं होती है।
34. विद्युत तापन युक्तियों में जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रधातुओं के क्यों बनाए जाते हैं?
उत्तर- शुद्ध धातुओं के प्रतिरोधकता और गलनांक मिश्रधातुओं के प्रतिरोधकता और गलनांक की तुलना में काफी कम होता है। अतः ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातु का न बनाकर मिश्रधातु के बनाए जाते हैं। नाइक्रोम एक मिश्रधातु है जिसमें 60% निकेल, 26% लोहा, 12% क्रोमियम तथा 2% मैंगनीज रहता है।
इस मिश्रधातु के प्रतिरोधकता और गलनांक काफी उच्च होते हैं।
35. जूल के तापन नियम क्या है?
उत्तर- जूल के तापन नियम :
(i) दिए गए प्रतिरोधक में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का वर्ग उत्पन्न ताप के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।
(ii) उत्पन्न ताप प्रतिरोधक के समानुपाती होती है।
(iii) उत्पन्न ताप समय के समानुपाती होती है जितने समय तक धारा प्रवाहित होती है।
अगर चालक से बहने वाली विद्युत धारा I हो, चालक का प्रतिरोध R हो तथा समय t हो तो उत्पन्न ताप
विद्युत शक्ति
36. विद्युत शक्ति की परिभाषा लिखें।
उत्तर- कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। अगर कोई कार्यकर्त्ता t सेकेण्ड में W कार्य करे तो
अथवा ऊर्जा के उपभुक्त होने की दर को शक्ति कहते हैं।
शक्ति P को इस प्रकार व्यक्त करते हैं-
इसका S.I मात्रक वाट है।
37. कूलॉम-नियम क्या है?
उत्तर- दो आवेश के बीच लगनेवाला बल उन दो आवेशों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
मान लिया कि दो आवेश और
के बीच की दूरी r है और उनके बीच लगने वाला बल F है, तो कूलॉम-नियम से,
जहाँ पर k समानुपातिक स्थिरांक है।
38. किसी चालक तार से बहने वाली विद्युत धारा की प्रबलता की परिभाषा दें।
उत्तर- किसी चालक तार से प्रति सेकेण्ड बहने वाली आवेश को विद्युत धारा की प्रबलता कहते हैं।
अगर किसी चालक तार से t सेकेण्ड में Q कूलाम आवेश प्रवाहित होती है तो विद्युत धारा की प्रबलता
धारा का मान एम्पियर में मापा जाता है।
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