11. विद्रोही और राज : 1857 का आंदोलन और उसके व्याख्यान


प्रश्न 1. बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व संभालने के लिए पुराने शासकों से क्या आग्रह किया
उत्तर- विद्रोही सिपाहियों द्वारा नेतृत्व संभालने के लिए पुराने शासकों से आग्रह–

  1. विद्रोही सिपाही पुराने शासकों से सहयोग के लिए आंदोलन को और अधिक प्रखर बनाना चाहते थे।
  2. वे पुराने शासकों का नेतृत्व चाहते थे, क्योंकि उन्हें युद्ध करने और शासन करने का पर्याप्त अनुभव था। मेरठ आदि के सिपाहियों ने बहादुरशाह को नेतृत्व संभालने के लिए मजबूर कर दिया था।
  3. वे अपने विद्रोह की विधिक-मान्यता देना चाहते थे। जब बहादुरशाह ने नेतृत्व स्वीकार कर लिया तो उनका विद्रोह वैध हो गया।
  4. इसी प्रकार कानपुर में नाना साहिब, आरा में कुंवर सिंह, लखनऊ में बिरजिस कद्र आदि को शहर के लोगों और उनकी जनता ने नेतृत्व संभालने के लिए विवश किया जिसे उन्हें स्वीकार करना पड़ा।

प्रश्न 2. उन साक्ष्यों के बारे में चर्चा कीजिए जिनसे पता चलता है कि विद्रोही योजनाबद्ध और समन्वित ढंग से काम कर रहे थे?
उत्तर- विद्रोहियों के योजनाबद्ध और समन्वित ढंग से काम करने के साक्ष्य–

  1. अवध मिलिट्री पुलिस पर कैप्टेन हियर्से की सुरक्षा का उत्तरदायित्व था। यह दायित्व भारतीय सिपाहियों पर था। यहीं 41 वीं नेटिव इन्फेंट्री भी तैनात थी। इन्फेंट्री की दलील थी कि अवध मिलिट्री डियर्स की हत्या कर दे या उसे गिरफ्तार करके 41 वीं नेटिव इन्फेंट्री के हवाले कर दे परंतु मिलिट्री पुलिस ने दोनों दलीलें खारिज कर दी।
  2. विद्रोह के सुनियोजन विषय में एक इतिहासकार चार्ल्स बाल के लेख से पता चलता है। उसके अनुसार सिपाहियों की पंचायतें कानपुर सिपाही लाइन में जुटती थी। स्पष्ट है कि कुछ निश्चित फैसले अवश्य लिये जाते होंगे।
  3. सिपाही लाइनों में रहते थे और सभी की जीवन शैली एक जैसी थी। वे प्रायः एक से थे। ऐसे में कोई योजना बनाना उनके लिए आसान था।

प्रश्न 3. 1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों की किस हद तक भूमिका थी?
उत्तर- 1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों की भूमिका-अंग्रेजों ने भारत में लगभग धर्म-निरपेक्ष नीति को अपनाया तथा बलपूर्वक किसी का धर्म परिवर्तन कभी नहीं किया। अंग्रेज लोगों का उद्देश्य भारत में धर्म-प्रसार नहीं वरन् धन प्राप्ति था। परंतु व्यापारियों के साथ भारत आए धर्म-प्रचारकों ने ईसाई मत का प्रसार प्रारंभ कर दिया। इस मत के प्रसार के लिए सरकारी कोष से धन दिया जाता था तथा ईसाई बनने वाले व्यक्तियों को पद प्रदान करने में प्राथमिकता मिलती थी।

हिन्दू धर्म और इस्लाम के विरुद्ध खुल्लमखुल्ला अनेक बातों का प्रचार करते थे। वे धर्म के अवतारों तथा पैगम्बरों की निन्दा करते तथा उनको गालियाँ देते थे तथा सरकार उनको रोकने का प्रयास नहीं करती थी। इसलिए भारतीयों को इन धर्म-प्रचारकों से घृणा होने लगी थी। लार्ड विलियम बैंटिक ने एक नियम पास किया जिसके अनुसार ईसाई धर्म को अपनाने पर ही हिन्दू पिता की सम्पत्ति में पुत्र को भाग मिल सकता था।

इसके अतिरिक्त डलहौजी की गोद-निषेध नीति ने भी हिन्दू धर्मावलम्बियों को असन्तुष्ट किया क्योंकि गोद लेने की प्रथा धार्मिक थी। हिन्दू धर्म के अनुसार नि:संतान व्यक्ति को मुक्ति नहीं मिल सकती अतः उसे किसी निकट संबंधी को गोद लेकर सन्तानहीनता के कलंक से मुक्त होना पड़ता था। किन्तु डलहौजी के निषेध करने पर हिन्दुओं में बहुत असंतोष फैला। एक नियम द्वारा कारागार में बन्दियों को अपना जलपान रखने से रोक दिया गया। इससे हिन्दुओं की शंका और बढ़ गई कि उनको ईसाई बनाया जा रहा है। शिक्षा पद्धति से भी भारतीय असंतुष्ट थे क्योंकि मिशन स्कूलों में बच्चे के मस्तिष्क में हिन्दू एवं मुस्लिम धर्म के विरुद्ध बातें भरकर उसे ईसाई धर्म की ओर आकर्षित किया जाता था।

ईस्ट इण्डिया कंपनी के प्रधान ने ब्रिटिश हाऊस ऑफ कॉमन्स में यह विचार व्यक्त किया, “परमेश्वर ने भारत का विस्तृत साम्राज्य इंग्लैण्ड को इसलिए सौंपा है कि ईसा का झण्डा भारत के एक कोने से दूसरे कोने तक सफलतापूर्वक लहराता रहे। प्रत्येक व्यक्ति को इस बात का पूर्ण प्रत्यन करना चाहिए कि समस्त भारतीयों को ईसाई बनाने के महान कार्य किसी प्रकार की बाधा उपस्थित न होने पाए।”


प्रश्न 4. विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए क्या तरीके अपनाए गये?
उत्तर- विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए अपनाये गए तरीके:

  1. विद्रोह के समय लोगों की जाति और धर्म का स्थान नहीं दिया गया। विद्रोहियों द्वारा जारी की गई घोषणाओं में जाति और धर्म का भेदभाव किये बिना समाज के सभी वर्गों का आह्वान किया जाता था।
  2. अनेक घोषणायें मुस्लिम राजकुमारों या नवाबों की ओर से या उनके नाम पर जारी की गई थीं परंतु उनमें भी हिन्दुओं की भावनाओं का ध्यान रखा जाता था।
  3. इस विद्रोह को एक ऐसे युद्ध के रूप में पेश किया जा रहा था जिसमें हिन्दू और मुसलमान दोनों का लाभ-हानि बराबर था।
  4. अंग्रेजों के आगमन से पूर्व की हिन्दू-मुस्लिम एकता का पुनस्मरण कराया जाता था और मुगल साम्राज्य के अंतर्गत विभिन्न समुदायों के सह-अस्तित्व का गुणगान किया जाता था।
  5. बहादुरशाह के नाम से जारी की गई घोषणा में मुहम्मद और महावीर दोनों की दुहाई देते हुए जनता से इस विद्रोह में शामिल होने के लिए अपील की जाती थी।

प्रश्न 5. अंग्रेजों ने विद्रोह को कुचलने के लिए क्या कदम उठाये?
उत्तर- अंग्रेजों द्वारा विद्रोह को कुचलने के लिए उठाये गये कदम निम्नलिखित है –

  1. प्राप्त साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि अंग्रेजों ने इस विद्रोह का दमन बड़ी कठिनाई से किया। उन्होंने सैनिक टुकड़ियाँ लगाने से पूर्व उनकी सहायता के लिए कुछ कानून और मुकदमों की घोषणायें की।
  2. उन्होंने सम्पूर्ण उत्तर भारत में मार्शल लॉ लागू कर दिया। फौजी अफसरों को आदेश दिया गया कि विद्रोह में भाग लेने वालों पर मुकदमा चलाया जाए और सजा-ए-मौत दी जाए।
  3. विद्रोह के दमन के लिए ब्रिटेन से आई सेना को कलकत्ता और पंजाब में लगा दिया गया। जून 1857 से सितम्बर 1857 के बीच उन्होंने दिल्ली पर अधिकार कर लिया। दोनों पक्षों की भारी हानि हुई।
  4. गंगा घाटी में विद्रोह का दमन धीमा रहा। सैनिक टुकड़ियाँ गाँव-गाँव में जाकर विद्रोह का दमन कर रहा था।
  5. सैन्य कार्यवाही के साथ अंग्रेजों ने ‘फूट डालो’ की नीति भी अपनाई।

प्रश्न 6. अवध में विद्रोह इतना व्यापक क्यों थाकिसानताल्लुकदार और जमींदार उसमें क्यों शामिल हुए?
उत्तर- अवध में विद्रोह के व्यापक होने और किसान ताल्लुकदार और जमींदारों के उसमें शामिल होने के कारण–

  • 1856 ई. में अवध को औपचारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य का अंग घोषित कर दिया गया। अवध के विलय से अनेक क्षेत्रों और रियासतों में असंतोष छा गया।
  • अवध के अधिग्रहण से नवाब की गद्दी समाप्ति के साथ ताल्लुकदार भी तबाह हो गये। उनकी सेना और सम्पत्ति दोनों खत्म हो गईं। एकमुश्त बंदोबस्त के अंतर्गत अनेक ताल्लुकदारों की जमीन छीन ली गई।
  • ताल्लुकदारों से सत्ता हस्तांतरण का परिणाम किसानों की दृष्टि से बुरा हुआ। हालांकि ताल्लुकदार किसानों से खूब राजस्व और अन्य मदों से धन वसूल करते थे। परंतु किसानों के हितैषी भी थे। वे गाहे-बगाहे विभिन्न स्थितियों में सहायता भी करते थे परंतु अब उनकी सारी आशायें समाप्त हो गयीं। इसके परिणामस्वरूप ताल्लुकदार और किसान अंग्रेजों से रुष्ट हो गये और उन्होंने नवाब की पत्नी बेगम हजरत के नेतृत्व में विद्रोह में साथ दिया।
  • किसान फौजी बैरकों में जाकर सिपाहियों से मिल गये। इस प्रकार किसान भी सिपाहियों के विद्रोही कृत्यों में शामिल होने लगे।

प्रश्न 7. विद्रोही क्या चाहते थेविभिन्न सामाजिक समूहों की दृष्टि में कितना फर्क था?
उत्तर- विद्रोहियों की इच्छाएँ और सामाजिक समूहों की दृष्टि में अंतर:
विद्रोही क्या चाहते थेइस बारे में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता। जो स्रोत उपलब्ध हैं उनसे अंग्रेजों की सोच का पता चलता है। विद्रोही प्रायः अनपढ़ थे इसलिए कुछ लिख भी नहीं सकते थे। केवल उनके द्वारा जारी कुछ घोषणाओं और इश्तहारों का ज्ञान होता है और उनसे विशेष जानकारी नहीं मिलती। उनकी मुख्य इच्छाएँ निम्नलिखित थी:

1. एकता की कल्पना:
1857 
के विद्रोहियों में एकता के विचारों का दर्शन होता है। उनके द्वारा जारी घोषणाएँ जाति व धर्म से ऊपर होती थीं। अनेक घोषणाएँ मुस्लिम राजकुमारों या नवाबों की ओर से होती थी। देश में एकता स्थापित करने के लिए विद्रोह को हिन्दू और मुसलमान दोनों के लिए बराबर लाभ-हानि के रूप में पेश किया जा रहा था। हालांकि अंग्रेजों ने इसमें बाधा डालने की अनेक कोशिशें की थी।

2. उत्पीड़न का विरोध:
विद्रोही अंग्रेजों द्वारा पैदा की जाने वाली पीड़ाओं का विरोध करना चाहते थे। इसके लिए वे समय-समय पर अंग्रेजों की निन्दा करते थे। लोग इस बात से क्रुद्ध थे कि छोटे-बड़े जमीन मालिकों की जमीन छीन ली गयी है और विदेशी व्यापार ने दस्तकारों और बुनकरों को तबाह कर दिया है। विद्रोही चाहते थे कि उनका रोजगारधर्मसम्मान और उनकी अस्मिता बनी रहे।

3. वैकल्पिक सत्ता की तलाश:
विद्रोही चाहते थे कि अंग्रेजों के स्थान पर किसी भारतीय सत्ता का शासन हो जिससे उनके कष्ट कम हो सकें और उनकी बेइज्जती न हो। इसीलिए विद्रोह के प्रारम्भ में दिल्लीलखनऊ और कानपुर जैसे स्थानों पर अंग्रेजी सत्ता के समाप्त होते ही वहाँ मुगल शासन की तर्ज पर शासन स्थापित किया गया और अनेक नियुक्तियाँ की गईं। वस्तुतः वे अब अंग्रेजों से छुटकारा पाना चाहते थे।


प्रश्न 8. 1857 के विद्रोह के बारे में चित्रों से क्या पता चलता हैइतिहासकार इन चित्रों का किस तरह से विश्लेषण करते हैं?
उत्तर- 1857 के विद्रोह के बारे में चित्रों से प्राप्त जानकारी और इतिहासकारों द्वारा इनका विश्लेषण:
1857 
के विद्रोह विषयक चित्र महत्त्वपूर्ण जानकारी देते हैं और इतिहासकारों ने इनका निम्नवत विश्लेषण किया है–
1. 
अंग्रेजों द्वारा निर्मित कुछ चित्रों में अंग्रेजों को बचाने और विद्रोहियों को कुचलने वाले अंग्रेजी नायकों का गुणगान किया गया है। 1859 में टॉमस जोन्स बार्कर द्वारा बनाया गया चित्र ‘रिलीफ ऑफ लखनऊ’ इसी श्रेणी का उदाहरण है। जब विद्रोही सेना ने लखनऊ पर घेरा डाल दिया तो लखनऊ के कमिश्नर हेनरी लारेंस ने ईसाइयों को एकत्र किया और अति सुरक्षित रेजीडेंसी में शरण ली। बाद में कॉलेन कैम्पबेल नामक कमांडर ने एक बड़ी सेना को लेकर रक्षक सेना को छुड़ाया।

2. बार्कर की ही एक अन्य पेंटिंग में कैम्पबेल के आगमन के क्षण को आनन्द मनाते हुए दिखाया गया है। कैनवस के मध्य में कैम्पबेलऑट्रम और हेवलॉक हैं। चित्र के अगले भाग में पड़े शव और घायल इस घेराबंदी के दौरान हुई लड़ाई की गवाही देते हैं। जबकि मध्य भाग में घोड़ों की विजयी तस्वीरें हैं। इससे ज्ञात होता है कि अब ब्रिटिश सत्ता और नियंत्रण बहाल हो चुका है। इस प्रकार के चित्रों से इंग्लैण्ड स्थित जनता में अपनी सरकार के प्रति भरोसा पैदा किया जाता था।

3. ब्रिटिश अखबारों में भारत में हिंसा के चित्र और खबरें खूब छापती थीं। जिनको देखकर और पढ़कर ब्रिटेन की जनता प्रतिशोध और सबक सिखाने की मांग कर रही थी।

4. निःसहाय औरतों और बच्चों के चित्र भी बनाये गये। जोजेफ लोएल पेंटल के ‘स्मृति चित्र’ (In memorium) में अंग्रेज औरतें और बच्चे एक घेरे में एक-दूसरे से लिपटे दिखाई देते हैं। वे लाचार और मासूम दिख रहे हैं।

5. कुछ अन्य रेखाचित्रों और पेंटिंग्स में औरतें उग्र रूप में दिखाई गयी हैं। इनमें वे विद्रोहियों के हमले से अपना बचाव करती हुई नजर आती हैं। उन्हें वीरता की मूर्मि के रूप में दर्शाया गया है।

6. कुछ चित्रों में ईसाईयत की रक्षा हेतु संघर्ष को दिखाया गया है। इसमें बाइबिल को भी दिखाया गया है।

7. इन चित्रों में बदले की भावना के उफान में अंग्रेजों द्वारा विद्रोहियों की निर्मम हत्या का प्रदर्शन है।

8. 1857 के विद्रोह को एक राष्ट्रवादी दृश्य के रूप में चित्रित किया गया। इस संग्राम में कला और साहित्य को बनाये रखा गया। कलाओं में झाँसी की रानी को घोड़े पर सवार एक हाथ में तलवार और दूसरे में घोड़े की रास थामे दिखाया गया है। वह साम्राज्यवादियों का सामना करने के लिए रणभूमि की ओर जा रही हैं।


प्रश्न 9. एक चित्र और एक लिखित पाठ को चुनकर किन्हीं दो स्रोतों की पड़ताल कीजिए और इस बारे में चर्चा कीजिए कि उनसे विजेताओं और पराजितों के दृष्टिकोण के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर- पाठ्य पुस्तक में अनेक चित्र और लिखित पाठ दिए गए हैं। इनके आधार पर विजेताओं और पराजितों के दृष्टिकोण के बार में बताया जा सकता है। यहाँ चित्रकार फेलिस बिएतो का एक चित्र लेते हैं। इसमें लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह द्वारा बनवाए गए रंग बाग (Pleasure Garden) के खण्डहरों में चार व्यक्ति दिखाये गए हैं। 1857 के विद्रोह में इसकी रक्षा के लिए 2000 से अधिक विद्रोही सिपाही तैनात थे।

उनको कैम्पबेल के नेतृत्व वाली सेना ने मार डाला। इसके अहाते में नरकंकाल पड़े हुए दिखाई देते हैं। विजेताओं का दृष्टिकोण का दृष्टिकोण ऐसे चित्रों को बनवा कर लोगों में आतंक पैदा करने का था। इस चित्र की भयावहता लोगों में दहशत उत्पन्न कर सकती है। पराजितों का दृष्टिकोण इससे अलग हो सकता है। उनकी दृष्टि से कैम्पबेल के प्रति क्रोधाग्नि धधक सकती है। वे कैम्पबेल को निर्दयी व्यक्ति कह सकते हैं। वे इस चित्रण को झूठा भी कह सकते हैं क्योंकि इतने विद्रोहियों की हत्या एक साथ संभव नहीं है। ”


प्रश्न 10. भारत के मानचित्र पर कलकत्ता (कोलकाता)बम्बई (मुम्बई)मद्रास (चेन्नई) को चिह्नित कीजिए जो 1857 में ब्रिटिश सत्ता के तीन मुख्य केंद्र थे। मानचित्र और को देखिए तथा उन इलाकों को चिह्नित कीजिए जहाँ विद्रोह सबसे व्यापक रहा। औपनिवेशिक शहरों से ये इलाके कितनी दूर या कितनी पास थे।
उत्तर-
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प्रश्न 11. 1857 के विद्रोही नेताओं में से किसी एक की जीवनी पढ़ें। देखिए कि उसे लिखने के लिए जीवनीकार ने किन स्रोतों का उपयोग किया है। क्या उनमें सरकारी रिपोर्टोंअखबारी खबरोंक्षेत्रीय भाषाओं की कहानियोंचित्रों और किसी अन्य चीज का इस्तेमाल किया गया हैक्या सभी स्रोत एक ही बात करते हैं या उनके बीच फर्क दिखाई देते हैंअपने निष्कर्षों पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।


प्रश्न 12. 1857 पर बनी कोई फिल्म देखिए और लिखिए कि उसमें विद्रोह किस तरह दर्शाया गया है। उसमें अंग्रेजोंविद्रोहियों और अंग्रेजों के भारतीय वफादारों को किस तरह दिखाया गया हैफिल्म किसानोंनगरवासियोंआदिवासियोंजमींदारों ताल्लुकदारों आदि के बारे में क्या कहती हैफिल्म किस तरह की प्रतिक्रिया को जन्म देना चाहती है?
उत्तर- छात्र स्वयं करें।