| 12. औपनिवेशिक शहर : नगर, योजना , स्थापत्य |
प्रश्न 1. औपनिवेशिक शहरों में रिकॉर्ड्स संभाल कर क्यों रखे जाते थे?
उत्तर- औपनिवेशिक शहरों में रिकॉर्ड्स संभालकर रखने के कारण–
- आंकड़े और जानकारियों के आधार पर शासन को सुचारु रूपसे चलाने के लिए।
- व्यापारिक गतिविधि यों का विस्तृत ब्यौरा व्यापार को कुशलता से प्रोन्नत करने के लिए।
- शहरों के विस्तार के साथ शहरी नागरिकों के रहन-सहन, आचार-विचार, शैक्षिक जागरूकता, राजनीतिक रूझान आदि का अध्ययन करने के लिए।
- किसी स्थान की भौगोलिक बनावट और भू-दृश्यों को भलीभाँति समझने के बाद उन स्थानों पर शहरीकरण, साम्राज्य विस्तार आदि करने के लिए।
- जनसंख्या के आकार में होने वाली सामाजिक बढ़ोत्तरी का अध्ययन करके तद्नुसार प्रशासनिक तौर-तरीकों, नियम-कानूनों आदि को बनाने तथा उनका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए।
प्रश्न 2. औपनिवेशिक संदर्भ में शहरीकरण के रुझानों को समझने के लिए जगणना संबंधी आँकड़े किस हद तक उपयोगी होते हैं?
उत्तर- औपनिवेशिक संदर्भ में शहरीकरण के रुझानों को समझने के लिए जगणना संबंधी आँकड़ों का उपयोग–
- यह भारत में शहरीकरण की प्रवृत्ति के अनुसार जन-सुविधाएँ, आवाम एवं अन्य व्यवस्था करने में सहायक थे।
- इनसे बीमारियों से होने वाली मृत्यु, उम्र, लिंग, जाति एवं व्यवसाय के विषय में जानकारी मिलती है।
- औपनिवेशिक काल के वर्गीकरण, विन्यास आदि का गहन अध्ययन करके उपयुक्त निष्कर्ष लेने के लिए भी जनसंख्या के आँकड़े सहायक बनते हैं।
- तत्कालीन जनगणना आयुक्तों की आकलन और परिकलन की कमियों को समझकर सही निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए।
- जनगणना एक ऐसा साधन थी जिसके आधार पर आबादी के विषय में सामाजिक जानकारियों को सरल आँकड़ों में परिवर्तित किया जाता था। परन्तु इस जानकारी में कई भ्रम थे।
- इन आंकड़ों के आधार पर ही अंग्रेज छल साधित कानून बनाकर भारतीय जनता को अपने जाल में बुरी तरह फँसा लेते थे सैन्य व्यवस्था भी इसी आधार पर की जाती थी।
- जहाँ की आजादी तीव्रता से बढ़ती थी अंग्रेज यह अनुमान लगा लेते थे कि वे इलाके समृद्ध हैं अतः इसी आधार पर भू-राजस्व एवं अन्य करों का निर्धारण करते थे।
प्रश्न 3. “व्हाइट” और “ब्लैक” टाउन शब्दों का क्या महत्त्व था?
उत्तर- व्हाइट और ब्लैक टाउन शब्दों का महत्त्व–
- औपनिवेशिक शहरों में गोरों (Whites) अर्थात् अंग्रेजों और कालों (Blacks) अर्थात् भारतीयों की अलग-अलग बस्तियाँ होती थीं। उस समय के लेखन में भारतीयों की बस्तियों को “ब्लैक टाउन” और गोरों की बस्तियों को “व्हाइट टाउन” कहा जाता था।
- इन शब्दों का प्रयोग नस्ली भेद प्रकट करने के लिए किया जाता था। अंग्रेजों की राजनीतिक सत्ता की मजबूती के साथ ही यह नस्ली भेद भी बढ़ता गया।
- इन दोनों बस्तियों के मकानों में भी अंतर होता था। भारतीय एजेंटों और बिचौलियों ने बाजार के आस-पास ब्लैक टाउन में परम्परागत ढंग के दालान मकान बनवाये। सिविल लाइन्स में बँगले होते थे। सुरक्षा के लिए इनके आस-पास छावनियाँ भी बसाई जाती थी।
- व्हाइट्स टाउन साफ सुथरे होते थे जबकि ब्लैक टाउन गंदे होते थे। यहाँ बीमारी फैलने का डर होता था।
प्रश्न 4. प्रमुख भारतीय व्यापारियों ने औपनिवेशिक शहरों में खुद को किस तरह स्थापित किया?
उत्तर- औपनिवेशिक शहरों में भारतीय व्यापारियों की दशा:
विशेष रूप से बम्बई के व्यापारियों ने अपनी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत कर ली थी। बम्बई में व्यापार की एक महत्त्वपूर्ण वस्तु अफीम थी। भारतीय व्यापारी और बिचौलियों ने इस व्यापार से बहुत लाभ कमाया। उन्होंने बम्बई की अर्थव्यवस्था को मालवा, राजस्थान और सिंध जैसे अफीम उत्पादक इलाकों के साथ जोड़ दिया। कालांतर में ये व्यापारी पूँजीपति बन गए। पूँजीपति वर्ग में पारसी, मारवाड़ी, कोंकणी, मुसलमान, गुजराती, बनिये, बोहरा, यहूदी आदि विभिन्न समुदायों के लोग थे।
अमेरिका के गृहयुद्ध के समय भारतीय व्यापारियों और बिचौलियों के लिए कपास का व्यापार मुनाफे का सौदा था। भारतीय व्यापारियों ने इसका खूब लाभ उठाया। 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक भारतीय व्यापारी कॉटन मिल जैसे नए उद्योगों में अपना पैसा लगाने लगे। निर्माण गतिविधियों में भी उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रश्न 5. औपनिवेशिक मद्रास में शहरी और ग्रामीण तत्त्व किस हद तक घुलमिल गये थे?
उत्तर- औपनिवेशिक मदास में शहरी और ग्रामीण तत्त्वों का घुल-मिल जाना:
- मद्रास शहर अनेक गाँवों को मिलाकर विकसित किया गया। यहाँ विविध समुदायों के लिए व्यवसाय एवं रोजगार के अवसर थे। अनेक प्रकार के कार्यवाही कई समुदाय मद्रास आकर यहीं बस गए।
- प्रारंभ में कंपनी के अधीन नौकरी पाने वालों में स्थानीय ग्रामीण वेल्लालार जाति थे। इन्होंने ब्रिटिश शासन के कारण मिले अवसरों का सर्वाधिक लाभ उठाया।
- तेलुगु कोमाटी समुदाय एक शक्तिशाली ताकतवर व्यावसायिक समूह था। इसका शहर के अनाज व्यवसाय पर नियंत्रण था।
- पेरियार और वन्नियार गरीब तबके का अधिसंख्यक कामगार वर्ग था। ये सभी लोग मद्रास शहर में ही रच-बस गए। उपर्युक्त तथ्य दर्शाते हैं कि मद्रास एक अर्ध ग्रामीण शहर बन गया था।
प्रश्न 6. अठारहवीं शताब्दी में शहरी केन्द्रों का रूपान्तरण किस तरह हुआ?
उत्तर- अठारहवीं शताब्दी में शहरी केन्द्रों का रूपान्तरण–
- मुगल साम्राज्य का पतन होने के साथ ही पुराने नगरों का अस्तित्व समाप्त हो गया और क्षेत्रीय शक्तियों का विकास होने के कारण नये नगर बनने लगे। इनमें लखनऊ, हैदराबाद, सेरिंगपट्म, पूना, नागपुर, बड़ौदा तथा तंजौर आदि उल्लेखनीय हैं।
- व्यापारी, प्रशासक, शिल्पकार तथा अन्य व्यवसायी पुराने नगरों से यहाँ आने लगे। यहाँ उनको काम तथा संरक्षण उपलब्ध था। चूँकि राज्यों के बीच युद्ध होते रहते थे इसलिए भाड़े के सैनिकों के लिए भी काम था।
- मुगल साम्राज्य के अधिकारियों ने कस्बे और गंज (छोटे स्थायी बाजार) की स्थापना की। इन शहरी केन्द्रों में यूरोपीय कम्पनियों ने भी धाक जमा ली। पुर्तगालियों ने पणजी में, डचों ने मछलीपट्टनम्, अंग्रेजों ने मद्रास तथा फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी में अपने व्यापार केन्द्र खोल लिए।
- 18 वीं शताब्दी में स्थल आधारित साम्राज्यों का स्थान जलमार्ग आधारित यूरोपीय साम्राज्यों ने ले लिया। भारत में पूँजीवाद और वाणिज्यवाद को बढ़ावा मिलने लगा।
- मध्यकालीन शहरों-सूरत, मछलीपट्टनम् तथा ढाका का पतन हो गया।
- प्लासी युद्ध के पश्चात् अंग्रेजी व्यापार में वृद्धि हुई और मद्रास, कलकत्ता तथा बम्बई जैसे शहर आर्थिक राजधानियों के रूप में स्थापित हुए।
- ये शहर औपनिवेशिक प्रशासन और सत्ता के केन्द्र बन गये।
- इन शहरों को नये तरीके से बसाया गया और भवनों तथा संस्थानों का निर्माण किया गया। रोजगार के विकास के साथ ही यहाँ लोगों का आगमन भी तेज हो गया।
प्रश्न 7. औपनिवेशिक शहर में सामने आने वाले नये तरह के सार्वजनिक स्थान कौन से थे? उनके उद्देश्य क्या थे?
उत्तर- औपनिवेशिक शहर में सामने वाले नये तरह के सार्वजनिक स्थान और उनके उद्देश्य–
- 18 वीं शताब्दी तक मद्रास, कलकत्ता और बम्बई महत्त्वपूर्ण बन्दरगाह बन गये। यहाँ की बस्तियों में वस्तुओं के विशाल भंडार और कई कारखाने भी खुल गए थे।
- यूरोपीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा के कारण सुरक्षा के उद्देश्य से बस्तियों का दुर्गीकरण किया गया। भारतीयों की बस्तियाँ किलों से बाहर होती थीं। नस्ली भेदभाव के कारण गोरों के शहर को श्वेत शहर (White Town) और भारतीयों के शहर को ब्लैक शहर (Black Town) कहा जाने लगा।
- रेल परिवहन की सुविधा बढ़ने के साथ ही अन्य शहर भी बंदरगाह के शहरों से जुड़ गये। कलकत्ता के बाहरी शहरों में यूरोपियों ने अपनी जूट मिलें खोली ली।
- मद्रास की आबादी तृतीयक क्षेत्र या सेवा व्यवसाय (Tertiary Sector) में अधिक लगी हुई थी।
- भारत के दो औद्योगिक शहर-कानपुर और जमशेदपुर थे। कानपुर में चमड़े की वस्तुएँ, ऊनी और सूती कपड़े बनते थे जबकि जमशेदपुर में स्टील का उत्पादन होता था। अंग्रेजों के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण भारत कभी भी एक आधुनिक औद्योगिक देश नहीं बन पाया।
प्रश्न 8. उन्नीसवीं सदी में नगर नियोजन को प्रभावित करने वाली चिंताएँ कौन-सी थी?
उत्तर- 19 वीं सदी में नगर नियोजन को प्रभावित करने वाली चिंताएँ–
- शासक वर्ग के लिए नस्ली भेद-भाव पर आधारित क्लब, रेसकोर्स और रंगमंच बनाए गए थे।
- अमीर भारतीय एजेंटों और बिचौलियों के विस्तृत मकान ब्लैक टाउन में थे। वे अंग्रेज स्वामियों को खुश करने के लिए रंगीन पार्टियों करते थे और समाज में हैसियत दिखाने के लिए मंदिर बनवाते थे।
- मजदूर वर्ग के लोग शहर के विभिन्न इलाकों में कच्ची झोंपड़ियाँ बनाकर रहते थे। ये अपने यूरोपीय और भारतीय स्वामियों के लिए खाना पकाने, पालकी ढोने, गाड़ी ढोने, चौकीदारी, भारवाहक तथा निर्माण कार्यों और गोदी मजदूर के रूप में कार्य करते थे।
- 1857 के विद्रोह से अंग्रेज आशंकित रहने लगे। अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने ‘सिविल लाइन्स’ के नाम से नए शहरी इलाके विकसित किये। इसमें केवल अंग्रेज रहते थे और यहाँ की बस्तियों को छावनियों के रूप में विकसित किया गया।
- ब्लैक टाउन में स्वच्छता का अभाव था और शोरगुल होता था। प्रारंभ में अंग्रेजों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया परन्तु 1860-70 में प्लेग और हैजा फैलने के बाद अपने स्वास्थ्य की सलामती के लिए उन्होंने स्वच्छता कार्यों की ओर ध्यान देना आरम्भ किया था।
- किन स्थापत्य शैलियों के आधार पर इमारतें और भवन बनवाए जाएँ, यह भी एक चिंता का विषय था। पाश्चात्य स्थापत्य शैली, भारतीय स्थापत्य शैली, ग्रीक रोमन स्थापत्य शैली अथवा गॉथिक शैली विकल्प के रूप में थे।
- औपनिवेशिक शासन शहरों के रख-रखाव, सुधार और अन्य कार्यों को लागू करने के लिए पर्याप्त धन की जरूरत थी अत: एक लाटरी कमेटी का गठन किया गया।
- यातायात के साधनों की व्यवस्था भी एक समस्या थी।
प्रश्न 9. नए शहरों में सामाजिक संबंध किस हद तक बदल गए?
उत्तर- नए शहरों के सामाजिक संबंधों में बदलाव–
- नये शहरों का सामाजिक जीवन अति सम्पन्नता और अति-निर्धनता का मिश्रित रूप था।
- यहाँ की जिन्दगी अति व्यस्त थी। यहाँ यातायात के साधन घोड़ा गाड़ी, ट्राम या बस थे काम करने और आवास का स्थान अलग-अलग बनवाया गया था।
- नए नगरों में टाउन हाल, पार्क, रंगशाला और सिनेमा हॉल जैसे सार्वजनिक स्थल थे।
- यहाँ कई सामाजिक समूह थे और समान के विभिन्न वर्गों के लोग काम करने के लिए यहाँ आते थे।
- मद्रास, बम्बई और कलकत्ता के नक्शे पुराने भारतीय शहरों से भिन्न थे। इनमें बनाए गए भवनों पर औपनिवेशिक उद्भव की स्पष्ट छाप थी।
- अंग्रेजों और यूरोपियों के लिए हिल स्टेशन आदर्श स्थान बन गये थे। यहाँ की इमारतें यूरोपीय स्थापत्य शैली की होती थी। रेल परिवहन शुरू होने के साथ ही हिल स्टेशनों में अनेक प्रकार के लोग पहुँचने लगे थे। भारतीयों ने भी वहाँ रहना शुरू कर दिया।
- जिन हिल स्टेशनों में चाय और कॉफी के बागान लगाए गए थे, वहाँ बड़ी संख्या में मजदूर आने लगे। इस तरह ये स्थान हिल स्टेशन यूरोपीय लोगों के लिए पर्यटन स्थल ही नहीं बल्कि व्यवसायिक आय का माध्यम भी बन गए थे।
- मध्यवर्गीय वर्ग-क्लर्कों, शिक्षकों, वकीलों, डाक्टरों, इंजीनियरों और लेखाकार की मांग बढ़ने लगी। यहाँ शिक्षितों की संख्या अधिक थी।
- समय के अनुसार तेजी से बदलाव आ रहे थे औरतें भी नौकरानी, फैक्ट्री मजदूर, शिक्षिका, रंगकर्मी और फिल्म कलाकारों के रूप में कई कार्य संपन्न कर रही थी।
- मेहनत वश मजदूर शहरों के आकर्षण से प्रभावित होकर यहाँ रह रहे थे लेकिन उनकी आमदनी इतनी नहीं थी कि वे अपनी जीविका चला सकें।
- नगरों में नस्ली-भेद-भाव चरम पर था। मद्रास में व्हाइट टाउन और ब्लैक टाउन में क्रमशः यूरोपीय और भारतीय अलग-अलग रहते थे। कम्पनी के लोगों को भारतीयों से विवाह करने की अनुमति नहीं थी।
- यूरोपीय ईसाई होने के कारण डच और पुर्तगाल के नागरिकों को भी अंग्रेजों के साथ रहने की छूट थी। यूरोपियों के कम संख्या में थे अतः प्रशासकीय कार्य इन लोगों को भी सौंपे गए थे। मद्रास शहर का विकास मुट्ठी भर गोरों की आवश्यकता और सुविधाओ के अनुसार किया जा रहा था।
प्रश्न 10. भारत के नक्शे पर मुख्य नदियों और पर्वत श्रृंखलाओं को पारदर्शी कागज लगाकर रेखांकित करें। बम्बई, कलकत्ता और मद्रास सहित इस अध्याय में उल्लिखित दस शहरों को चिन्हित कीजिए और उनमें से किन्हीं दो शहरों के बारे में संक्षेप में लिखिए कि उन्नीसवीं सदी के दौरान उनका महत्त्व किस तरह बदल गया। उनमें से एक औपनिवेशिक शहर तथा दूसरा उससे पहले का शहर होना चाहिए।
उत्तर-
19 वीं शताब्दी का एक औपनिवेशिक शहर:
1. बम्बई:
बम्बई भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक विशाल बन्दरगाह है। यह शहर सात द्वीपों को मिलाकर बना है। प्रारंभ में यह पुर्तगाल के अधीन था। बंदरगाह होने के कारण यह औपनिवेशिक भारत की व्यापारिक राजधानी थी। 19 वीं शताब्दी तक भारत का आधा निर्यात और आयात इसी बंदरगाह से होता था। इस व्यापार की महत्वपूर्ण वस्तु अफीम थी। यहाँ कई पूँजीपति का विकास हुआ। 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यह विश्व व्यापार से जुड़ गया। यहाँ पर बनवाई गई अनेक बड़ी इमारतें यूरोपीय शैली पर आधारित थीं।
19 वीं शताब्दी से पहले का एक प्राचीन शहर:
2. दिल्ली:
दिल्ली एक प्राचीन शहर है। यहाँ से महाभारत कालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। उस समय यह शहर इन्द्रप्रस्थ के रूप में जाना जाता था। 17 वीं शताब्दी में इसे शाहजहाँनाबाद कहा जाता था। इसको मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बसाया था। यहाँ अनेक बड़ी इमारतें बनायी गईं जिनके अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। अंग्रेजों के शासन काल में नई दिल्ली की नींव रखी गई और 1911 ई. में इसे राजधानी के रूप में चुना गया। आज यह शहर भारत की राजधानी है। दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहाँ संसद सदस्य और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि के आवास और कार्यालय हैं। यहाँ सभी प्रदेशों और संघ राज्यों के निवासी और प्रतिनिधि रहते हैं।
प्रश्न 11. पता लगाइए कि आपके कस्बे या गाँव में स्थानीय प्रशासन कौन-सी सेवाएँ प्रदान करता है। क्या जलापूर्ति, आवास, यातायात और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता आदि सेवायें भी उनके हिस्से में आती हैं? इन सेवाओं के लिए संसाधनों की व्यवस्था कैसे की जाती है? नीतियाँ कैसे बनाई जाती हैं? क्या शहरी मजदूरों या ग्रामीण इलाकों के खेतीहर मजदूरों के पास नीति निर्धारण में हस्तक्षेप का अधिकार होता है? क्या उनसे राय ली जाती है? अपने निष्कर्षों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।
प्रश्न 12. अपने शहर या गाँव में पाँच तरह की इमारतों को चुनिए। प्रत्येक के बारे में पता लगाइये कि उन्हें कब बनाया गया, उनको बनाने का फैसला क्यों लिया गया। उनके लिए संसाधनों की व्यवस्था कैसे की गई, उनके निर्माण का जिम्मा किसने उठाया और उनको बनाने में कितना समय लगा। उन इमारतों के स्थापत्य या वास्तु शैली संबंधी आयामों का वर्णन करिए और औपनिवेशिक स्थापत्य से उनकी समानताओं या भिन्नताओं को चिन्हित कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।
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