6. मुहावरे


1. चिराग तले अंधेरा - पण्डित के घर में घोर मूर्खता का आचरण 


2. बिल्ली के गले में घंटी बाँधना - अपने को संकट में डालना  


3. अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग - सबका भिन्न-भिन्न मत


4. आँख का अंधा नाम नयन सुख। - नाम बड़ा और गुण उसके विपरीत


5. न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी - कार्य करने के लिए कोई असाधारण शर्त रख देना


6. बहती गंगा में हाथ धोना - मौके का लाभ उठाना


7. दूध का दूध पानी का पानी - ठीक-ठीक न्याय हो जान


8. जले पर नमक छिड़कना - दुःखी व्यक्ति को और दुःखी करना


9. हवा में महल बनाना - असम्भव कार्य करने की कोशिश करना


10. कागजी घोड़े दौड़ाना - केवल लिखा पढ़ी करना, पर कुछ काम की बात न होना


11. कलेजे पर साँप लोटना - डाह करना


12. उड़ती चिड़िया पहचानना - मन की बात ताड़ लेना


13. हथेली पर सरसों जमाना - असंभत्र कार्य शीघ्रताशीघ्र कर देना


14. घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध - अपने लोगों में आदर नहीं मिलता है


15. रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया - सर्वनाश हो गया पर घमण्ड नहीं गया


16. अधजल गगरी छलकत जाय - छोटे आदमी का बहुत दिखावा करना


17. आगे कुआं पीछे खाई - दुविधा में पड़‌ना


18. अक्ल के घोड़े दौड़ाना - व्यर्थ दिमाग लगाना


19. अंधे की लाठी होना - सहारा होना


20. ऊँट के मुँह में जीरा - जरूरत से बहुत कम


21. गड़े मुर्दे उखाड़ना - पुरानी बातों को कुरेदना


22. होश उड़ाना - डर जाना


23. गुस्सा पीकर रह जाना - बर्दास्त करना


24. अंगूठा छाप होना - निरक्षर होना


25. अंगार सिर पर धरना - कठिन परिश्रम करना


26. अंगुली पकड़ कर पहुंचा पकड़ना - थोड़ा-सा सहारा पाकर विशेष प्राप्ति की चाह रखना


27. अंगूठा दिखाना – ऐन-मौके पर धोखा देना


28. अक्ल पर पत्थर पड़ना - बुद्धि भ्रष्ट होना 


29. अक्ल का दुश्मन होना - मूर्ख होना


30. अन्धे को चिराग दिखाना - मूर्ख को उपदेश देना


31. अन्धे के आगे रोना - असहाय व्यक्ति से सहायता माँगना


32. अन्धों में काना राजा – मुर्खों के बिच सुयोग्य बनना


33. अपना उल्लू सीधा करना - अपना स्वार्थ सिद्ध करना 


34. अपना-सा मुँह लेकर रह जाना - लज्जित होना 


35. अपनी खिचड़ी अलग पकाना - स्वार्थी होना; अलग होना


36. अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना – अपना अहित करना 


37. अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना - अपनी प्रशंसा स्वयं करना


38. आँख का काजल चुराना - गुप्त भावों को जान लेना


39. आँख दिखाना - डौटना, धमकाना


40. आँख में धूल झोंकना - धोखा देना


41. आँखें चार होना - प्रेम होना, एक दूसरे को देखना


42. आँखें मिलाना - सामना करना


43. आँखें नीची करना - प्रतिष्ठा नष्ट होना


44. आँखों में खून उत्तर आना - अत्यधिक क्रोध करना


45. आँखों का तारा - अत्यन्त प्यारा


46. आँख का अन्धा गाँठ का पूरा - मूर्ख किन्तु धनी व्यक्ति


47. आँखों का तारा – अत्यंत प्यारा


48. आँचल पसारना - याचना करना या माँगना


49. आँसू पीकर रह जाना - चुपचाप दुःख सह लेना


50. आकाश (आसमान) के तारे तोड़ना - असंभव को संभव करना


51. आकाश-कुसुम होना - पहुँच से बाहर होना


52. आकाश-पाताल एक करना - सारा प्रयास कर डालना


53. आकाश टूट पड़ना - अकस्मात् विपत्तियों का आना


54. आग में घी डालना - उकसाना, बढ़ावा देना; क्रोध भड़‌काना


55. आटा-दाल का भाव मालूम होना - कष्टों कअनुभव होना


56. आठ-आठ आँसू रोना - पछताना


57. आधा तीतर आधा बटेर - गड़बड़ का काम


58. आपे से बाहर होना - अत्यन्त क्रुद्ध होना


59. आबरू लूटना - इज्जत नष्ट करना


60. आसमान में उड़ना - कल्पना में उड़ान भरना


61. आसमान सिर पर उठाना - आवश्यकता से अधिक परिश्रम करना


62. आस्तीन का साँप होना - विश्वासघाती होना


63. ईंट का जवाब पत्थर से देना - मुंहतोड़ जवाब देना


64. ईंट से ईंट बजाना - नष्ट भ्रष्ट कर देना (तहस-नहस कर देना)


65. दूज/ईद का चाँद होना - बहुत समय बाद दिखायी देना


66. उलटी माला फेरना - अनिष्ट की कामना करना


67. उलटी गंगा बहाना - असंभव कार्य करना


68. उलटे उस्तरे (छुरे) से मूड़ना - मूर्ख बनाकर स्वार्थ सिद्ध करना


69. ऊँची दूकान फीका पकवान - आडम्बर-ही-आडम्बर


70. न ऊधौ का लेना न माधौ का देना - किसी से किसी प्रकार का सम्बन्ध न रखना


71. एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा - बुरे व्यक्ति का बुरा ही सम्पर्क


72. एक ही थैली के चट्टे-बट्टे - सबका एकसमान होना


73. एक लाठी से सबको हाँकना - सभी के साथ समान व्यवहार करना


74. एड़ी चोटी का पसीना एक करना - अत्यधिक परिश्रम करना


75. ओखली में सिर देना - जानबूझ कर संकट मोल लेना


76. ओछे के प्रीत बालू की भीत - दुष्ट व्यक्तियों की मित्रता क्षणिक होती है


77. औंधे मुँह गिरना - पराजित होना


78. कंगाली में आटा गीला - मुसीबत में और मुसीबत पड़ना


79. कमर कसना - तत्पर रहना, तैयार रहना


80. कलेजा थामकर रह जाना - कठिनता से धैर्य धारण करना


81. कलई खोलना - भेद प्रकट करना


82. कलेजे पर पत्थर रखना - असह्य दुःख बर्दाश्त करना


83. काजल की कोठरी - कलंकित होने का स्थान


84. काठ का उल्लू - बहुत बड़ा मूर्ख


85. कान पर जूँ तक न रेंगना - बिलकुल ध्यान न देना


86. कानों-कान खबर न होना - गुप्त रहना


87. काबुल में भी गये होते हैं - अच्छे-बुरे लोग सभी जगह मिलते हैं।


88. काला अक्षर भैंस बराबर - निरक्षर


89. किताबी कीड़ा होना – बहुत पढ़ना


90. किराये का ट‌ट्टू होना - बेगारी करना, पैसे की लालच से साथ देना


91. किस्मत खुलना - सफलता मिलना


92. कीचड़ उछालना - बदनाम करना 


93. कुआँ खोदते फिरना - मरने का प्रयास करना


94. कुत्ते की मौत मरना - बुरी तरह मरना


95. कूप-मण्डूक होना - सीमित ज्ञान होना


96. कोल्हू का बैल होना - रात-दिन परिश्रम करना


97. कौड़ी के मोल बिकना - बेकार (सस्ते में नीलाम होना)


98. खग जाने खग ही की भाषा - एक साथ रहनेवाले एक-दूसरे का भाव समझते हैं।


99. खयाली पुलाव पकाना - मनमानी कल्पनाएँ


100. खाक में मिलना - नष्ट हो जाना


101. खिल्लियाँ उड़ाना - मज़ाक़ या व्यंग्य करना


102. खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे - सबल पर वश न चलने पर निर्बल पर क्रोध प्रदर्शित करना


103. खून-पसीना एक करना - अत्यन्त कठोर परिश्रम करना


104. गड़े मुर्दे उखाड़ना - पुरानी बातों पर प्रकाश डालना


105. गजभर की छाती होना - अत्यधिक गर्व का अनुभव करना


106. गरजने वाले बरसते नहीं - कहने वाले करके नहीं दिखाते


107. गरदन पर सवार होना - पीछा न छोड़ना


108. गले पर छुरी फेरना - अहित करना


109. गागर में सागर भरना - थोड़े में ही बहुत कहना


110. गाल बजाना - व्यर्थ की बातें करना


111. गिरगिट-सा रंग बदलना - अवसरवादी होना


112. गुड़ खाय गुलगुलों से परहेज - झूठा ढोंग रचना


113. गुड़-गोबर होना - काम बिगड़ जाना


114. गूलर का फूल होना - कभी दिखायी न पड़ना


115. घड़ों पानी पड़ना - अत्यन्त लज्जित होना


116. घर का भेदी लंका ढहावै - घर का शत्रु भयंकर होता है


117. घर का न घाट का - कहीं का न रहना


118. घर की मुर्गी दाल बराबर - अपने साधनों का कोई मूल्य न होना