| 4. सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र |
प्रश्न 1. तिथि के हिसाब से इन सबको क्रम दें–
(क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश
(ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना
(ग) यूरोपीय संघ की स्थापना
(घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना
उत्तर- (क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश – 2001
(ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना – 1957
(ग) यूरोपीय एंघ की स्थापना – 1992
(घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना – 1994
प्रश्न 2. ‘आसियान वे’ या आसियान शैली क्या है?
(क) आसियान के सदस्य देशों की जीवन शैली है।
(ख) आसियान सदस्यों के अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज का स्वरूप है।
(ग) आसियान सदस्यों की रक्षा नीति है।
(घ) सभी आसियान सदस्य देशों को जोड़ने वाली सड़क है।
उत्तर- (ख)
प्रश्न 3. इनमें से किसने ‘खुले द्वारा’ की नीति अपनाई?
(क) चीन
(ख) यूरोपयी संघ
(ग) जापान
(घ) अमरीका
उत्तर- (क)
प्रश्न 5. क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर- क्षेत्रीय संगठनों के बनाने के उद्देश्य–
(क) आर्थिक विकास को तेज करना और उसक माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक विकास करना।
(ख) कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र के नियमों पर आधारित क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देना।
प्रश्न 6. भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर क्या असर होता है?
उत्तर- भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर गहरा असर पड़ता है।
- यदि क्षेत्रीय संगठनों में भौगोलिक निकटता हो तो आपस में तालमेल रखना आवश्यक होता है अन्यथा अनेक प्रकार की बाधायें उत्पन्न हो जाती हैं।
- क्षेत्रीय संगठनों के निकट होने पर एक-दूसरे की विभिन्न क्षेत्रों में सहायता आसानी से कर सकते हैं।
- इससे अहस्तक्षेप को बढ़ावा मिलता है।
- उनके बीच आवागमन के साधन आसानी से जुटाये जा सकते हैं।
प्रश्न 7. आसियान विजन 2020 की मुख्य बातें क्या हैं?
उत्तर- आसियान विजन 2020 की मुख्य बातें–
- अंतराष्ट्रीय समुदाय में आसियान की एक बहिर्मुखी भूमिका होगी जिससे उसको विश्व में लोकप्रियता प्राप्त हो सके।
- टकराव के स्थान पर बातचीत को महत्त्व दिया जायेगा। इसी आधार पर कम्बोडिया से टकराव को टाला गया, पूर्वी तिमोर के संकट को टाला गया।
- पूर्वी एशियाई सहयोग पर बातचीत जारी रखी जायेगी। इसलिए इसकी बैठक 1999 से जारी है।
प्रश्न 8. आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभों और उनके उद्देश्यों के बारे में बताएँ।
उत्तर- आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभ और उनके उद्देश्य–
- आसियान सुरक्षा समुदाय
- आसियान आर्थिक समुदाय
- आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय
आसियान सुरक्षा समुदाय का मुख्य उद्देश्य सैनिक टकराहट को टालना और बातचीत के द्वारा समस्या का हल निकालना है। इसके अलावा शांति, निष्पक्षता, सहयोग और अहस्तक्षेप को बढ़ावा देना है। आसियान आर्थिक समुदाय का उद्देश्य आसियान देशों का साझा बाजार और उत्पादन आधार तैयार करना तथा इस इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद करना है। आसियान सामाजिक सांस्कृतिक मुद्रा और समाज और संस्कृति में वृद्धि करना है।
प्रश्न 9. आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से किस तरह अलग है?
उत्तर- आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से निम्नलिखित प्रकार से अलग है–
- 1978 में तत्कालीन नेता देंग श्याआपेंग ने चीन में आर्थिक सुधारों और खुले द्वारा की नीति की घोषणा की।
- इस घोषणा के पश्चात् यह निश्चित किया गया कि विदेशी पंजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता को प्राप्त किया जाय। बाजारमूलक अर्थव्यवस्था को अपनाने के लिए चीन में अपना तीरका अपनाया।
- चीन में शॉक थेरेपी को महत्त्व नहीं दिया बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को क्रमबद्ध तरीके से आरंभ किया।
- कृषि का निजीकरण कर दिया गया जिसके कारण कृषि उत्पादों तथा ग्रामीण में पर्याप्त आय हुई।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निजी बचत को महत्त्व दिया गया जिससे ग्रामीण उद्योगों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हुई। इस प्रकार उद्योग और कृषि दोनों ही क्षेत्रों में चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर तेज रही।
- व्यापार के नये कानून तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Special Economic Zone) का निर्माण किया गया। इससे विदेशी व्यापार में अदभुत बढ़ोत्तरी हुई।
- उसने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को महत्व दिया । फलस्वरूप उसके पास विदेशी मुद्रा का विशाल भंडार हो गया है। विदेशी मुद्रा की सहायता से वह दूसरे देशों में निवेश कर रहा है।
- 2001 में चीन विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया है। इस प्रकार वह दूसरे देशों में अपनी अर्थव्यवस्था खोलने में सक्षम हो गया है।
प्रश्न 10. किस तरह यूरोपीय देशों ने युद्ध के बाद की अपनी परेशानियों सुलझाई? संक्षपे में उन कदमों की चर्चा करें जिनसे होते हुए यूरोपयी संघ की स्थापना हुई?
उत्तर- युद्ध के बाद यूरोपीय देशों द्वारा अपनी परेशानियां सुलझाने के तरीके और यूरोपीय संघ की स्थापना के कदम–
- द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् विश्व में शीत युद्ध का दौर आरंभ हुआ, इससे यूरोपीय देशों को मेल मिलाप का अवसर मिल गया।
- मार्शल योजना के अंतर्गत अमरीकन ने यूरोपीय देशों के पुनर्गठन के लिए आर्थिक सहायता की।
- इसी योजना के अंतर्गत 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहायोग की स्थापना हुई जिसके माध्यम से यूरोपीय देशों को आर्थिक मदद मिली।
- 1949 में राजनैतिक सहयोग के लिए यूरोपीय परिषद् की स्थापना हुई।
- पूंजीवादी देशों के बीच आर्थिक एकीकरण बढ़ता गया और इसके परिणामस्वरूप 1957 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना हुई।
- सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् इसका तेजी से राजनीतिकरण हुआ। 1992 में इस प्रक्रिया के फलस्वरूप यूरोप संघ की स्थापना हुई।
- यूरोपीय संघ के रूप में समान विदेशी नीति और सुरक्षा नीति, आंतरिक मामलों तथा न्याय से जुड़े मुद्दो पर सहयोग और समान मुद्रा के चलन के लिए रास्ता तैयार हो गया।
प्रश्न 11. यूरोपीय संघ को क्या चीजे एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन बनाती हैं।
उत्तर- यूरोपीय संघ को प्रभावी क्षेत्रीय संगठन बनाने वाली चीजें–
- यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था 2005 में सबसे बड़ी थी। उसका सकल घरेलु उत्पाद 12000 अरब डालर से अधि क था जो अमरीका से थोड़ा अधिक था।
- इसकी मुद्रा यूरो (Euro) है जिसकी विश्व व्यापार में हिस्सेदारी अमरीकी डॉलर से तिगूनी है।
- यूरोपीय संघ की आर्थिक शक्ति का प्रभाव निकटवर्ती देशों के साथ सुदूर एशिया और अफ्रीका के देशों में भी है।
- विश्व व्यापार संगठन में भी इसका महत्त्वपूर्ण स्थान है।
- यूरोपीय संघ का राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव विस्तृत है। यूरोपीय संघ के कई सुरक्षा परिषद् के स्थायी और अस्थायी सदस्य है।
- यूरोपीय संघ सैनिक दृष्टि से दूसरा ताकतवर राज्य है। यूरोपीय संघ के दो देशों-ब्रिटेन और फ्रांस के पास परमाणु हथियार हैं।
- संचार-प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान की दृष्टि से विश्व में इसका दूसरा स्थान है।
- अंतर्राष्ट्रीय संगठन के तौर पर यूरोपयी संघ राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मामलों में हस्तक्षेप करने में सक्षम है।
प्रश्न 12. चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूदा एकधुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्को से अपने विचारों को पुष्ट करो।
उत्तर- चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूद एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती देने वाली क्षमतायें–
निचित रूप से भारत और चीन की अर्थव्यवस्था इस लायक हो गयी है कि वे एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकती है जो निम्नलिखित तर्कों से स्पष्ट है–
- दोनों देशों ने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग और व्यापार के लिए सीमा पर चार पोस्ट खोलने के समझौते किये हैं। निश्चित ही इससे आर्थिक ताकत बढ़ी है।
- 1999 से भारत और चीन के मध्य व्यापर 30% वार्षिक की दर से बढ़ रहा है।
- भारत और चीन के बीच 1992 का 33 करोड़ 80 लाख डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार 2006 में 18 अरब डॉलर का हो चुका है।
- विदेशों में ऊर्जा से उत्पन्न विवाद को उन्होंने आपस में हल कर लिया है।
- दोनों देशों की विश्व व्यापार संगठन के प्रति समान नीतियां है।
प्रश्न 13. मुल्कों की शांति और समृद्धि क्षेत्रीय संगठनों को बनाने और मजबूत करने पर टिकी है। इस कथन की पुष्टि करें।
उत्तर- यह कथन सत्य है कि मुल्कों की शांति और समृद्धि क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों को बनाने और मजबूत करने पर टिकी है। इसका उदाहरण दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) है। इस संगठन के देशों ने क्षेत्रीय आर्थिक संगठन पर ही विशेष जोर दिया जिसके कारण ये न केवल आर्थिक दृष्टि से अपितु राजनैतिक दृष्टि से शक्तिशाली हो गये है। वे महाशक्ति के विकल्प के रूप में खड़ा हो गया है। उसने विभिन्न देशों के साथ शांति, निष्पक्षता, सहयोग, अहस्तक्षेप को बढ़ाने की नीति पर समझौते किये हैं।
उन्होंने आपसी मतभेद तथा सम्प्रभुता के अधिकारों के सम्मान पर सहमति जताई है। ऐसा करके ही संगठन को मजबूत किया जा सकता है। यदि कोई आर्थिक दृष्टि से समृद्ध हो जाता है और सैनिक दृष्टि से कमजोर है तो उसका काम बिना क्षेत्रीय संगठन के नही चल सकता। उस पर विदेशियों की नजर लगी रहेगी। क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों से ही कोई राष्ट्र आर्थिक दृष्टि से सम्बल हो सकता है और तभी वहां शांति स्थापित हो सकती है।
प्रश्न 14. भारत और चीन के बीच विवाद के मामलों की पहचान करें और बताएं कि वृहत्तर सहयोग के लिए उन्हें कैसे निपटाया जा सकता है। अपने सुझाव भी दीजिए।
उत्तर- भारत और चीन के बीच विवाद के मामले और वृहत्तर सहयोग के लिए निपटारे के तरीके–
- भारत और चीन के बीच सीमा विवाद है। इसको हल करने के लिए दोनों देशों के बीच 1981 से वार्ताओं की श्रृंखला शुरू हो गई है।
- पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम के चीन सहायता दे रहा है जिससे भारत को खतरा हो सकता है। इस समस्या को भी बातचीत द्वारा हल किया जा सकता है।
- बांग्लादेश और म्यांमार का चीन के साथ सैनिक संबंध है जो दक्षिण एशिया में भारतीय हितों के खिलाफ माना जाता है। यह मुद्दा दोनों के बीच टकराव नहीं उत्पन्न कर सकता।
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