2. दो ध्रुवीयता का अन्त


प्रश्न 1. सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र करें।
उत्तर- 1. सोवियत अर्थव्यवस्था में गतिरोध रहा, क्योंकि उसने अपने संसाधनों का अधिकांश परमाणु हथियार और सैन्य साजो सामान लगाया। इसके विपरीत पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऐसा नहीं किया। उसने अपने संसाधन जनता से संबंधित विकास कार्यों में लगाया इसलिए वहाँ की अर्थव्यवस्था में गतिरोध रहा।

2. सोवियत अर्थव्यवस्था केन्द्रीकृत थी जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था विकेन्द्रीकृत थी।

3. सोवियत संघ ने अपने गुट में शामिल पूर्वी यूरोप के देशों पर पर्याप्त धन खर्च किया जिससे उसके उपर आर्थिक दबाव बढ़ गया। संयुक्त राज्य अमरीका ने ऐसा नहीं किया। वह उन्हें ऋण जरूर देता था परंतु उसकी वसूली कड़ाई से करता था।


प्रश्न 2. किन बातों के कारण गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए?
उत्तर- सोवियत संघ में अनेक ऐसी समस्यायें उत्पन्न हो गयी थी जिनमें सुधार करने के लिए गोर्बाचेव बाध्य हुए। ये बातें या कारण निम्नलिखित हैं –

  1. सोवियत शासन प्रणाली नौकरशाही का नियंत्रण बहुत अधिक था जिससे यह प्रणाली सत्तावादी हो गई। इसके कारण लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समाप्त हो गई और लोग असंतुष्ट रहने लगे।
  2. सोवियत संघ एक दल (कम्युनिस्ट पार्टी) का शासन था जो जनता के प्रति जवाबदेह नहीं था।
  3. सोवियत संघ में 15 गणराज्य थे जिसमें रूस उनमें से एक राज्य था। परंतु सभी क्षेत्रों में रूस का प्रभुत्व था। अन्य गणराज्यों की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था। वहाँ की जनता उपेक्षित और दमित महसूस कर रही थी।
  4. सोवियत संघ ने प्रौद्योगिक और बुनियादी ढांचे (परिवहन ऊर्जा आदि) पर विशेष ध्यान नहीं दिया। वह पश्चिमी देशों से पिछड़ गया था।
  5. सोवियत संघ की जनता अपने राजनीतिक और आर्थिक सुविधाओं को प्राप्त करने में असफल रही और उसे आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
  6. सोवियत रूस में खाद्यान्न में कमी आ गई थी।

प्रश्न 3. भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए?
उत्तर- यद्यपि भारत दोनों महशक्तियों-सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों से अच्छा तालमेल रखता था परंतु वह सोवियत संघ के अधिक निकट था। उसने भारत की अनेक प्रकार से संकटों या सामान्य समय में सहायता की। इसलिए उसके विघटन से भारत निश्चित रूप से बहुत अधिक प्रभावित हुआ।

  1. सोवियत संघ के विघटन से शीतयुद्ध समाप्त हो गया और विश्व के विभिन्न भागों में शांति स्थापित हुई। इस शांति का भारत को भी लाभ मिला। परमाणु हथियारों के संचय और हथियारों की होड़ से भी राहत मिली।
  2. विश्व में अमेरिका की तानाशाही स्थापित हो गयी है। यह भारत की राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है।
  3. अमरीका भारत में भी अपनी मनमानी चल रहा है आये दिन कुछ शर्तों को मानने के लिए विवश करता है।
  4. अन्य देशों की भांति भारत की अर्थव्यवस्था भी अमरीका से प्रभावित हो रही हैं। भारत द्वारा परमाणु परीक्षण के समय आर्थिक प्रतिबंध लगाने के धमकी दे रहा था।
  5. उसने पड़ोसी देश पाकिस्तान को धन देकर भारत के विरुद्ध भड़काने का कार्य किया है।
  6. सोवियत का हिस्सा रूस भी अब शक्तिशाली नहीं रह गया। इसलिए उससे भारत को प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहायता अब कम मिल रही है।

प्रश्न 4. शॉक थेरेपी क्या थी? क्या साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का यह सबसे बेहतर तरीका था?
उत्तर- शॉक थेरेपी और साम्यवाद से पूंजीवाद की तरफ संक्रमण का यह सबसे बेहतर तरीका शॉक थेरेपी का शाब्दिक अर्थ-आघात पहुंचाकर उपचार करना है। साम्यवादी से पूंजीवाद की तरफ संक्रमण से पूंजीवाद की तरफ संक्रमण के लिए विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित इस मॉडल को शॉक थेरेपी कहा गया। साम्यवाद के पतन के पश्चात सोवियत संघ के गणराज्यों को पूंजीवाद की ओर मोड़ने का अच्छा तरीका समझा गया।

रूस, मध्य एशिया के गणराज्य और पूर्वी यूरोप के देशों में पूंजीवाद की ओर संक्रमण का यह सशक्त तरीका था। वस्तुतः सोवियत संघ के समय की प्रत्येक संरचना को समाप्त करना था। शॉक थेरेपी की सर्वाधिक मूल मान्यता थी कि मिल्कियत का सर्वोपरि प्रभावी रूप निजी स्वामित्व होगा। इसके अंतर्गत राज्य की सम्पदा के निजीकरण और व्यवसायिक स्वामित्व के ढांचे को तुरंत लागू करने की बात कही गई। सामूहिक फार्म को निजी फार्म में बदला गया और पूंजीवाद पद्धति से खेती शुरू हुई। व्यापार के द्वारा ही विकास की बात की गई। इस कारण मुक्त व्यापार को पूर्णरूप से अपनाना आवश्यक समझा गया। पूंजीवादी व्यवस्था को अपनाने के लिए वित्तिय खुलापन मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता और मुक्त व्यापार की नीति महत्त्वपूर्ण मानी गयी।


प्रश्न 5. निम्नलिखित कथन के पक्ष में एक लेख लिखें–
“
दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भारत को अपनी विदेश-नीति बदलनी चाहिए और रूस जैसे परंपरागत मित्र की जगह संयुक्त राज्य अमेरिका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।”
उत्तर- दूसरी दुनिया से तात्पर्य सोवियत संघ के गुट से है। अब इसका विघटन हो गया है। ऐसे में भारत को अपनी विदेश नीति रूप से बदलनी चाहिए। अब प्रश्न उठता है कि क्या रूस जैसे परम्परागत मित्र को छोड़ दिया जाये और उसकी जगह संयुक्त राज्य अमेरिका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

I. पक्ष में:

  1. भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करने तथा उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का फैसला किया है। इस नीति और हाल के वर्षों में प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि दर के कारण भारत अब अमरीका समेत कई देशों के लिए आकर्षक आर्थिक सहयोगी बन गया है।
  2. ऐसे में अमरीका से दोस्ती पर बल देना चाहिए।
  3. इसके अलावा कई अन्य तथ्य हैं जो इस बात पर बल देते हैं –
    • सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत के कुल निर्यात का 65% अमरीका को जाता है।
    • बोईग के 35% तकनीकी कर्मचारी भारतीय मूल के हैं।
    • सिलिकन वैली में 3 लाख भारतीय काम करते हैं।
    • उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र की 15% कम्पनियों की शुरुआत अमरीका में बसे भारतीयों ने की है।
    • कुछ विद्वान मानते हैं कि भारत और अमरीका के हितों में संबंध लगातार बढ़ रहा है और यह भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है। ये विद्वान ऐसी रणनीति अपनाने का पक्ष लेते हैं जिससे भारत अमरीका वर्चस्व का फायदा उठाएँ।
    • वे चाहते हैं कि दोनों के आपसी हितों का मेल हो और भारत अपने लिए सबसे बढ़िया विकल्प ढूंढ सके। इन विद्वानों की राय है कि अमरीका के विरोध की रणनीति व्यर्थ साबित होगी और आगे चलकर इससे भारत को हानि होगी।

II. विपक्ष में:

  1. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति को सैन्य शक्ति के संदर्भ में देखने वाले भारत के विद्वान भारत और अमरीका की बढ़ती हुई निकटता से भयभीत है। ऐसे विद्वान यह चाहते है कि: भारत अमरीका से अपना अलगाव बनाए रखे और अपना ध्यान अपनी राष्ट्रीय शक्ति को बढ़ाने पर लगाये।
  2. कुछ विद्वानों का विचार है कि भारत अपने नेतृत्व में विकासशील देशों का गठबंधन बनाए। कुछ वर्षों में यह गठबंधन अधिक शक्तिशाली हो जायेगा और अमरीकी वर्चस्व के विरोध में सक्षम हो जाएगा।