11. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार


(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

प्रश्न 1. दो देशों के मध्य व्यापार कहलाता है–
(क) अंतर्देशीय
(
ख) बाह्य व्यापार
(
ग) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
(
घ) स्थानीय व्यापार
उत्तर- (ग)


प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा एक स्थलबद्ध पोताश्रय है?
(क) विशाखापट्नम
(
ख) मुंबई
(
ग) एन्नोर
(
घ) हल्दिया
उत्तर- (क)


प्रश्न 3. भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार वहन होता है–
(क) स्थल और समुद्र द्वारा
(
ख) स्थल और वायु द्वारा
(
ग) समुद्र और वायु द्वारा
(
घ) समुद्र द्वारा
उत्तर- (ग)


प्रश्न 4. वर्ष 2003-04 में निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था?
(क) यूनाइटेड किंग्डम
(
ख) चीन
(
ग) जर्मनी
(
घ) स. रा. अमेरिका
उत्तर- (ग)



(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

प्रश्न 1. भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- 1950-51 में भारत का विदेशी व्यापार का मूल्य 1,214 करोड़ रुपए थाजो कि वर्ष 2004-05 में बढ़कर 8,37,133 करोड़ रुपए हो गया। वर्ष 2004-05 में भारत के निर्यात में एशिया एवं ओशेनिया की 47.41 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी। उसके बाद पश्चिमी यूरोप (23.80%) और अमेरिका (20.42%) आते हैं।


प्रश्न 2. पतन और पोताश्रय में अंतर बताइए।
उत्तर- पतन समुद्री तट पर जहाजों के ठहरने के स्थान होते हैं। यहाँ पर सामान लादने उतारने की सुविधाएँ होती हैं। जबकि पोताश्रय समुद्र में जहाजों के प्रवेश करने का प्राकृतिक स्थान है। यहाँ जहाज लहरों तथा तूफान से सुरक्षा प्राप्त करते हैं। प्राकृतिक पोताश्रय जैसे मुंबई मेंकृत्रिम पोताश्रय जैसे चेन्नई में।


प्रश्न 3. पृष्ठ प्रदेश के अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- किसी भी पत्तन या बंदरगाह के आस-पास के वे राज्य जिनका आयात एवं निर्यात एक ही पतन से होता है। उसे उस पतन का पृष्ठ प्रदेश कहा जाता है।


प्रश्न 4. उन महत्त्वपूर्ण मदों के नाम बताइए जिन्हें भारत विभिन्न देशों से अयात करता है?
उत्तर- भारत विभिन्न देशों से पेट्रोलियमउर्वरकखाद्य तेललुगदी तथा अपशिष्ट पेपरपेपर बोर्डअखबारी कागजअलौह धातुएँधातुमयी अयस्कलोहा एवं स्टीलमोतीमशीनरीदालेंकोयलागैर धात्विक खनिजविनिर्माणचिकित्सीय एवं फार्मा उत्पादरासायनिक उत्पादवस्त्र धागेकपडेस्वर्ण एवं चाँदी तथा व्यावसायिक उपस्कर आदि आयात करता है।


प्रश्न 5. भारत के पूर्वी तट पर स्थित पत्तनों के नाम बताइए।
उत्तर- भारत के पूर्वी तट पर कोलकाता पत्तन हुगली नदी परहल्दिया पत्तनपारादीप पत्तनविशाखापट्नम पत्तनचेन्नई पत्तनएन्नोर पत्तन और तूतीकोरिन पत्तन आदि स्थित हैं।



(ग) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें

प्रश्न 1. भारत में निर्यात और आयात व्यापार के संयोजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर- भारत के व्यापारिक संबंध विश्व के अधिकांश देशों एवं प्रमुख व्यापारी गुटों के साथ है। वर्ष 2004-05 के दौरान क्षेत्रानुसार एवं अपेक्षानुसार व्यापार तालिका 11.8 में दिया गया है। भारत का उद्देश्य आगामी पाँच वर्षों के दौरान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अपनी हिस्सेदारी दुगुना करने का है। वर्ष 2004-05 में भारत के निर्यात में एशिया एवं ओशेनिया की 47.41 प्रतिशत की हिस्सेदारी हैउसके बाद पश्चिमी यूरोप (23.80%) और अमेरिका (20.42%) आते हैं। इसी प्रकार भारत के आयाम में एशिया एवं ओशेनिया की सर्वाधिक (35.40%) मात्रा है। इसके बाद पश्चिमी यूरोप (22.60%) तथा अमेरिका (8.36%) आते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा भारत के निर्यात के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गंतव्य स्थान है। महत्त्व के आधार पर अन्य देशों में क्रमशः ब्रिटेनबेल्जियमजर्मनीजापानस्विटजरलैंडहांगकांगसंयुक्त अरब अमीरातचीनसिंगापुर तथा मलेशिया आदि आते हैं। भारत का अधिकतर विदेशी व्यापार समुद्री एवं वायु मार्गों द्वारा संचालित होता है। हालांकिविदेशी व्यापार का छोटा-सा भाग सड़क मार्ग द्वारा नेपालभूटानबांग्लादेश एवं पाकिस्तान जैसे पड़ोसी राज्यों में सड़क मार्ग द्वारा किया जाता है।


प्रश्न 2. भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- समय के साथ. भारत के विदेशी व्यापार की प्रकृति में बदलाव आया है। आयात एवं निर्यात दोनों की ही मात्रा में वृद्धि हुई हैलेकिन निर्यात की तुलना में आयात का मूल्य अधिक है। पिछले कुछेक वर्षों में व्यापार घाटे में भी वृद्धि है। घाटे में हुई इस वृद्धि के लिए अपरिष्कृत (क्रूड) पेट्रोलियम को उत्तरदायी ठहराया जा सकता हैजो भारत की आयात सूची में एक प्रमुख घटक है। भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं के संघटक में समय के साथ आए बदलाव में कृषि तथा समवर्गी उत्पादों का हिस्सा घटा हैजबकि पेट्रोलियम तथा अपरिष्कृत उत्पादों एवं अन्य वस्तुओं में वृद्धि हुई है। अयस्क खनिजों तथा निर्मित सामानों का हिस्सा वर्ष 1997-98 से 2003 04 तक लगभग एक जैसा रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों के हिस्से में वृद्धि का कारण पेट्रोलियम के मूल्यों में वृद्धि के साथ-साथ भारत में तेलशोधन क्षमता में वृद्धि भी जिम्मेदार है।

परंपरागत वस्तुओं के व्यापार में गिरावट का कारण मुख्यतः कड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा है। कृषि उत्पादों के अंतर्गत कॉफीमसालेचाय व दालों आदि जैसी परंपरागत वस्तुओं के निर्यात में गिरावट आई है। हालांकि पुष्पकृषि उत्पादोंताजे फलोंसमुद्री उत्पादों तथा चीनी आदि के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2003-04 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र ने भारत के कुल निर्यात मूल्य में अकेले 75.96 प्रतिशत की भागीदारी अंकित की है। निर्यात सूची में इंजीनियरिंग सामानों ने महत्त्वपूर्ण वृद्धि दर्शाई है।

वस्त्रोद्योग क्षेत्र सरकार द्वारा उदारतापूर्ण उपाय उठाए जाने के बावजूद पर्याप्त उपलब्धि नहीं प्राप्त कर पाया। इस क्षेत्र में चीन तथा अन्य पूर्व एशियाई देश हमारे प्रमुख प्रतिस्पर्धी है। भारत के विदेश व्यापार में मणि-रलों तथा आभूषणों की एक व्यापक हिस्सेदारी है। भारत ने 1950 एवं 1960 के दशक में खाद्यान्नों की गंभीर कमी का अनुभव किया है। उस समय भुगतान संतुलन बिल्कुल विपरीत था। 1970 के दशक के बाद हरित क्रांति में सफलता मिलने पर खाद्यान्नों का आयात रोक दिया गया। लेकिन 1973 में आए ऊर्जा संकट से पेट्रोलियम के मूल्य उछाल आया फलतः आयात वजट भी बढ़ गया। खाद्यान्नों के आयात की जगह उर्वरकों एवं पेट्रोलियम ने ले ली।