| 5. यात्रियों के नज़रिए : समाज के बारे में उनकी समझ |
प्रश्न 1. किताब-उल-हिन्द पर एक लेख लिखिए।
उत्तर- किताब-उल-हिन्द:
इस ग्रंथ की रचना उज्बेकिस्तान के यात्री अल-बिरूनी द्वारा अरबी भाषा में की गई। इसकी भाषा सरल और स्पष्ट है। इसमें कुल 80 अध्याय हैं। इसके मुख्य विषय-धर्म और दर्शन, त्यौहार, खगोल विज्ञान, कीमिया, रीति-रिवाज तथा प्रथायें, सामाजिक जीवन, भार तौल, मापन विधियाँ, मूर्तिकला, कानून, मापतंत्र, विज्ञान आदि हैं।
उसने प्रत्येक अध्याय में एक विशिष्ट शैली का प्रयोग किया है। प्रारम्भ में एक प्रश्न फिर संस्कृतवादी परम्पराओं पर आधारित वर्णन और अंत में अन्य संस्कृतियों की एक तुलना है। अल-बिरूनी गणित का भी प्रेमी था इसलिए गणित का भी जिक्र है। उसने अपने लेखन में अरबी भाषा का प्रयोग किया है। उसकी कृतियाँ उपमहाद्वीप के सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए समर्पित हैं।
प्रश्न 2. इन-बतूता और बनियर ने जिन दृष्टिकोणों से भारत में अपनी यात्राओं के वृत्तांत लिखे थे, उनकी तुलना कीजिए तथा अंतर बताइए।
उत्तर- इब्नबतूता और बर्नियर के यात्रा वृत्तांत में तुलना और अंतर:
मोरक्को यात्री इब्न-बतूता 14वीं शताब्दी में भारत आया था। उसके यात्रा वृत्तांत को रिहला कहा गया है। इसमें भारतीय उपमहाद्वीप के सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन के विषय में सुन्दर झांकी मिलती है। वह पुस्तकीय ज्ञान की अपेक्षा यात्रा से प्राप्त ज्ञान को महत्त्व देता था। इसलिए उसने विभिन्न देशों की लम्बी यात्रायें की। उसने 1332-33 में भारत की यात्रा की।
वह दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद-बिन-तुगलक से प्रभावित था। सुल्तान ने उसकी विद्वता से प्रभावित होकर उसे दिल्ली का काजी बना दिया। इस पद पर उसने कई वर्ष कार्य किया। उसने मालद्वीप में भी न्यायाधीश का कार्य किया। उसने विभिन्न संस्कृतियों, लोगों, आस्थाओं और मान्यताओं आदि के विषय में विस्तृत जानकारी दी है। वह बड़ा साहसी व्यक्ति था।
उसने यात्राओं में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। चोर तथा डाकुओं से भी उसका पाला पड़ा परन्तु उसने कभी थी धैर्य नहीं खोया। 17 वीं शताब्दी में फ्रांस का निवासी वर्नियर भारत आया था और हाँ 1665 से 1668 तक रहा। मुगल की यात्रा की और यात्रा-संस्मरण तैयार किए। उसने भारत के विभिन्न भागों की यात्रा की और यात्रा-संस्मरण तैयार किए।
उसने यूरोपीय समाज की तुलना भारत में तैयार किए गए सामाजिक परिवेश के साथ थी उसने अपना वृत्तांत अपने शासक और उच्च अधिकारियों को दिया इन सभी विवरणों में उसने भारत और यूरोपीय में हुए विकास की तुलना की। उसके यात्रा-संस्मरणे की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और उनका कई भाषाओं में प्रकाशन हुआ।
प्रश्न 3. बर्नियर के वृत्तांत से उभरने वाले शहरी केन्द्रों के चित्र पर चर्चा कीजिए।
उत्तर- बर्नियर के वृत्तांत से उभरने वाले शहरी केन्द्रों के चित्र:
बर्नियर ने मुगलकालीन शहरों को शिविर नगर कहा है। ये नगर अपने अस्तित्व के लिए राजकीय सहायता का शिविर पर निर्भर थे। बर्नियर का यह कथन विश्वसनीय नहीं लगता है। क्योंकि उस काल में भारत में सभी प्रकार के नगर अस्तित्व में थे। ये नगर उत्पादन केन्द्र व्यापारिक नगर, बंदरगाह नगर, धार्मिक केन्द्र और तीर्थ स्थान आदि के रूप में थे।
उसके अनुसार व्यापार समृद्ध था तथा नगर के व्यापारियों में एकता थी और वे समूहों में संगठित थे। पश्चिमी भारत में ऐसे समूहों को महाजन कहा जाता था। इनका मुख्यिा सेठ कहलाता था। इनके अलावा शहरी समूहों में चिकित्सक, अध्यापक, अधिवक्ता, चित्रकार, वास्तुविद्, संगीतकार और सुलेखन कार थे। इस प्रकार भारतीय नगर आकर्षण के केन्द्र थे।
प्रश्न 4. इन-बतूता द्वारा दास प्रथा के संबंध में दिए गए साक्ष्यों का विवेचन कीजिए।
उत्तर- इन-बतूता एवं दास प्रथा:
इब्नबतूता ने दास प्रथा के विषय में विस्तृत विवरण दिया है। दास खुले बाजार में आम वस्तुओं की तरह बेचे और उपहार स्वरूप दिये जाते थे। उदाहरण के लिए इब्नबतूता सिंध पहुँचा तो उसने सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक को भेंट के रूप में घोड़े और ऊँट के साथ दास भी दिए थे। उसने मुल्तान के गवर्नर को भी एक दास भेंट किया था। इब्नबतूता के अनुसार मुहम्मद बिन तुगलक ने नसीरूद्दीन नामक धर्मोपदेशक से प्रसन्न होकर उसे एक लाख टके (मुद्रा) तथा दो दास उपहारस्वरूप दिये।
इब्नबतूता के विवरण से पता चलता है कि सुल्तान के दरबार में ऐसी दासिया होती थी जो संगीत और गायन के कार्यक्रम में भाग लेती थी। उसने अपने अमीरों पर नजर रखने के लिए भी दासियों की नियुक्ति की थी। इस प्रकार दास और दासियां कई प्रकार के थे। दासों को श्रमशील कार्य में लगाया जाता था। वे पालकी ढोते थे। श्रमशील कार्य करने वाले दास-दासियों की कीमत बहुत कम होती थी। उन्हें सामान्य लोग भी रख सकते थे।
प्रश्न 5. सती प्रथा के कौन-से तत्त्वों ने बर्नियर का ध्यान अपनी ओर खींचा?
उत्तर- बर्नियर का ध्यान आकृष्ट करने वाले सती प्रथा के तत्त्व:
- सभी समकालीन यूरोपीय यात्रियों तथा लेखकों की तरह बर्नियर ने भी महिलाओं के साथ किये जाने वाले दुर्व्यवहार का वर्णन किया है।
- उसके अनुसार कुछ महिलायें प्रसन्नता से मृत्यु को गले लगा लेती थी जबकि अन्य को मरने के लिए विवश किया जाता था।
- वस्तुतः इस प्रथा के अन्तर्गत यदि किसी महिला का पति युद्ध में मारा जाता था या किसी अन्य कारण से मर जाता था तो उसे अपने शरीर को अग्नि के हवाले करना पड़ता था।
- बर्नियर ने एक 12 वर्षीय बच्ची को चिता की आग में जलते हुए देखा। उसके हाथ पैर बंधे हुए थे। बर्नियर को इससे काफी धक्का लगा और क्रोधित हुआ परन्तु कुछ न कर सका।
प्रश्न 6. जाति प्रथा के संबंध में अल-बिरूनी की व्याख्या पर चर्चा कीजिए।
उत्तर- जाति प्रथा के संबंध में अल-बिरूनी की व्याख्या:
- अल-बिरूनी ने भारतीय प्रथाओं को समझने के लिए विभिन्न स्थानों की यात्रा करने के साथ वेदो, पुराणे, भागवद्गीता, पतंजलि की कृतियों तथा मनुस्मृति आदि का भी अध्ययन किया।
- उसने विभिन्न समुदायों के प्रतिकथ्यों के माध्यम से जाति प्रथा को समझने का प्रयास किया। उसने बताया कि फारस में चार सामाजिक वर्गों की मान्यता थी। ये वर्ग निम्नलिखित है –
- (अ) घुड़सवार और शासक वर्ग
- (आ) भिक्षु, आनुष्ठानिक पुरोहित तथा चिकित्सक
- (इ) खगोल शास्त्री तथा वैज्ञानिक
- (ई) कृषक तथा शिल्पकार। इसके माध्यम से वह यह बताना चाहता था कि ये सामाजिक वर्ग, केवल भारत ही सीमित नहीं थे।
- उसने यह भी दर्शाया कि इस्लाम में सभी लोगों को समान माना जाता था और उनमें भिन्नतायें केवल धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न करने की थी।
- जाति प्रथा के सन्दर्भ में वह ब्राह्मणवादी व्याख्या मानता था परन्तु अपवित्रता की मान्यता को उसने स्वीकार नहीं किया। उसका मानना था कि प्रत्येक वस्तु जो अपवित्र हो जाती है, पवित्र होने का प्रयास करती है और ऐसा होता भी है।
- पवित्रता के सम्बन्ध में वह उदाहरण देता है। उसके अनुसार सूर्य हवा को स्वच्छ करता है और समुद्र में नमक पानी को गंदा होने बचाता है। उसका कहना है कि यदि ऐसा नहीं होता तो पृथ्वी पर जीवन असंभव हो जाता।
- उसके अनुसार जाति व्यवस्था से जुड़ी अपवित्रता की धारणा प्रकृति के नियमों के प्रतिकूल है।
प्रश्न 7. क्या आपको लगाता है कि समकालीन शहरी केन्द्रों में जीवन शैली की सही जानकारी प्राप्त करने में इन-बतूता का वृत्तांत सहायता है? अपने उत्तर के कारण दीजिए।
उत्तर- शहरी केन्द्रों में जीवन शैली की सही जानकारी प्राप्त करने में इन-बतूता का वृत्तान्त निश्चित रूप से सहायक है। इसके निम्नलिखित कारण है –
- इनबतूता 14 वीं शताब्दी में भारत आया था। उस समय तक पूरा उपमहाद्वीप एक ऐसी वैश्विक संचार तंत्र का हिस्सा बन चुका था जो पूर्व में यौन से लेकर पश्चिम में उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका तथा यूरोपीय देश तक फैला हुआ था।
- इब्न-बतूता ने स्वयं इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर यात्रायें की, पवित्र पूजा स्थलों को देखा, विद्वानों तथा शासको के साथ समय बिताया और कई बार काजी के पद पर कार्य किया।
- उसने शहरी केन्द्रों की उस विश्ववादी संस्कृति का गहन अध्ययन किया जहाँ अरबी,फारसी, तुर्की तथा अन्य भाषायें बोलने वाले लोग विचारों, सूचनाओं तथा उपाख्यानों का आदान-प्रदान करते थे।
- उसने धार्मिक लोगों, निर्दयी तथा दयावान् शासकों के साथ विचार-विमर्श किया।
- इब्न-बतूता ने यह भी देखा कि भारतीय उपमहाद्वीप के शहर उन लोगों के लिए लाभदायक है, जिनके पास आवश्यक इच्छा साधन तथा कौशल है। उसके पर्याप्त विकास की संभावनाएँ इस उप-महाद्वीप में थी।
- भारतीय शहरों में घनी आबादी थी और वे समृद्ध थे। कभी-कभी युद्ध अभियानों से इन्हें हानि होती थी। इन शहरों में अनेक सड़कें थीं और भीड़-भाड़ वाले बाजार थे। इनमें सभी सामान उपलब्ध था।
- वह बाजारों की आर्थिक विनिमय के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक गतिविधयों के केन्द्र भी बताता है। अधिकांश बाजारों में एक मस्जिद तथा एक मंदिर होता था। शहरों में मनोरंजन के लिए नर्तक भवन, संगीतकार भवनों का निर्माण किया गया था।
- इब्न-बतूता के अनुसार शहरी केन्द्रों का व्यापार विकसित था। भारतीय उपमहाद्वीप का व्यापार अंतर-एशियाई तंत्रों से सुव्यवस्थित रूप से जुड़ा था। भारतीय माल की मध्य तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में बहुत मांग थी। शिल्पकारों तथा व्यापारियों को माल की बिक्री से भारी मुनाफा होता था।
प्रश्न 8. चर्चा कीजिए कि बर्नियर का वृत्तांत किस सीमा तक इतिहासकारों को समकालीन ग्रामीण समाज को पुननिर्मित करने में सक्षम करता है?
उत्तर- समकालीन ग्रामीण समाज को पुनर्निर्मित करने में बर्नियर के वृत्तांत का योगदान –
1. बनियर ने समकालीन ग्रामीण समाज पर भी प्रकाश डाला है। वह भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के विषय में लिखता है कि यहाँ की भूमि रेतीली और बंजर है और यहाँ की खेती अच्छी नहीं है। इन इलाकों की आबादी भी कम है।
2. कृषि योग्य सभी क्षेत्रों में खेती नहीं होती है क्योंकि श्रमिकों का अभाव है। गवर्नरों द्वारा किये गये बुरे व्यवहार के कारण कई श्रमिक मर जाते है।
3. लोभी स्वामियों की मांगों को पूरा कर पाने में असमर्थ निर्धन ग्रामिणों को ने केवल जीवन निर्वाह के साधनों से वंचित कर दिया जात है बल्कि उन्हें अपने बच्चों से भी हाथ धोना पड़ता है। उसके बच्चों को दास बना लिया जाता है। कभी-कभी तंग आकर किसान गाँव भी छोड़ देते है।
4. बर्नियर एक अन्य स्थान पर विपरीत विवरण देता है। उसके अनुसार बंगाल का विशाल राज्य मिस्र से कई दृष्टियों से आगे है। वह चावल मक्का तथा जीवन की आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन में आगे है। वह ऐसी अनेक वाणिज्यिक वस्तुओं का उत्पादन करता है जिनका उत्पादन मिस्र में नहीं होता है। वह रेशम कपास और नील के उत्पादन में आगे है।
5. भारत के कई ऐसे भाग भी है जहाँ जनसंख्या पर्याप्त है. और भूमि पर खेती अच्छी होती है।
6. बर्नियर का कहना है कि मुगल साम्राज्य में सम्राट सम्पूर्ण भूमि का स्वामी था और इसको अपने अमीरों के बीच बाँटता था। उसके अनुसार भूमि पर निजी स्वामित्व न रहने के कारण किसान अपने बच्चों को भूमि नहीं दे सकते थे। उन्होंने उत्पादन में रुचि लेना बंद कर दिया। उसका यह विवरण विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि राज्य केवल राजस्व या लगान वसूल करता था। भूमि पर उसका अधिकार नहीं था।
प्रश्न 9. यह बर्नियर से लिया गया एक उद्धरण है: ऐसे लोगों द्वारा तैयार सुंदर शिल्पकारीगरी के बहुत उदाहरण है जिनके पास औजारों का अभाव है और जिनके विषय में यह भी नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने किसी निपुण कारीगर से कार्य सीखा है। कभी-कभी वे यूरोप में तैयार वस्तुओं की इतनी निपुणता से नकल करते हैं कि असली और नकली के बीच अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है।
अन्य वस्तुओं में, भारतीय लोग बेहतरीन बंदूकें और ऐसे सुंदर स्वर्णाभूषण बनाते हैं कि संदेह होता है कि कोई यूरोपीय स्वर्णकार कारीगरी के उत्कृष्ट नमूनों से बेहतर बना सकता है। अक्सर इनके चित्रों की सुन्दरता, मृदुलता तथा सक्षमता से आकर्षित हुआ है। उसके द्वारा उल्लिखित शिल्पकार्यों को सूचीबद्ध कीजिए तथा इसकी तुलना अध्याय में वर्णित शिल्प गतिविधियों से कीजिए।
उत्तर-
- गलीचा बनाना
- जरी का कार्य
- कसीदाकारी
- कढ़ाई
- सोने और चाँदी के वस्त्र
- विभिन्न प्रकार के रेशम तथा सूती वस्त्र
- सोने और चांदी की वस्तुएँ
इब्नबतूता ने भी भारतीय कपड़ों की प्रशंसा की है। इसके अनुसार विशेष रूप से सूती कपड़ा नहीन मलमल, रेशम जरी तथा साटन को विदेशों में मांग बहुत अधिक थी। उसके अनुसार महीन मलमल की कई किस्में इतनी अधिक महंगी थी कि उन्हें अमीर वर्ग तथा बहुत धनाढ्य लोग ही पहन सकते थे। उसने उस कालीन का वर्णन किया है जो दौलतमंद के बाजारों में विशाल गुंबदों में बिछायी जाती थी।
प्रश्न 10. विश्व के सीमारेखा मानचित्र पर उन देशों को चिह्नित कीजिए जिनकी यात्रा इब्नबतूता ने की थी। कौन-कौन के समुदों को उसने पार किया होगा?
- मोरक्को
- मक्का
- सीरिया
- इराक
- फारस
- यमन
- ओमान
- पूर्वी अफ्रीका
- मध्य एशिया
- सिंध
- मुल्तान
- कच्छ
- भारत
- श्रीलंका
- सुमात्रा
- चीन। उसने लाल सागर, अरब सागर और हिन्दमहासागर आदि समुद्रों को पार किया होगा।
प्रश्न 11. अपने ऐसे किसी बड़े संबंध (माता / पिता / दादा-दादी तथा नाना-नानी / चाचा-चाची) का साक्षात्कार कीजिए जिन्होंने आपके नगर अथवा गाँव के बाहर की यात्राएँ की हो? पता कीजिए।
- (क) ये कहाँ गये थे?
- (ख) उन्होंने कैसी यात्रा की?
- (ग) उन्हें कितना समय लगा?
- (घ) उन्होंने यात्रा क्यों की?
- (ङ) क्या उन्होंने किसी कठिनाई का सामना किया?
ऐसी समानताओं और भिन्नताओं को सूचीबद्ध कीजिए जो उन्होंने अपने रहने के स्थान और यात्रा किए गए स्थानों के बीच देखी, विशेष रूप से भाषा, पहनावा, खानपान, रीति-रिवाज, इमारतों सड़कों तथा पुरुषों और महिलाओं की जीवन शैली के संदर्भ में। अपने द्वारा हासिल जानकारियों पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।
प्रश्न 12. इस अध्याय में उल्लिखित यात्रियों में से एक के जीवन तथा कृतियों के विषय में और अधिक जानकारी हासिल कीजिए। उसकी यात्राओं पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए। विशेष रूप से इस बात पर जोर देते हुए कि उन्होंने समाज का कैसा विवरण किया है तथा इनकी तुलना अध्याय में दिए गए उद्धरणों से कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।
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