1. जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि एवं संघटन


(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

प्रश्न 1. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(क) 102.8 करोड़
(
ख) 318.2 करोड़
(
ग) 318.2 करोड़
(
घ) करोड़
उत्तर- (क)


प्रश्न 2. निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है?
(क) पश्चिम बंगाल
(
ख) उत्तर प्रदेश
(
ग) केरल
(
घ) पंजाब
उत्तर- (क)


प्रश्न 3. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य में नगरीय जनसंख्या का अनुपात सर्वाधिक है?
(क) तमिलनाडु
(
ख) केरल
(
ग) महाराष्ट्र
(
घ) गुजरात
उत्तर- (ख)


प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा एक समूह भारत में विशालतम भाषाई समूह है?
(क) चीनी-तिब्बती
(
ख) आस्ट्रिक
(
ग) भारतीय-आर्य
(
घ) द्रविड़

उत्तर- (ग)



(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।

प्रश्न 1. भारत के अत्यंत ऊष्ण एवं शुष्क तथा अत्यंत शीत व आर्द्र प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व निम्न है। इस कथन के दृष्टिकाण से जनसंख्या के वितरण में जलवायु की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- भू: विन्यास और जल की उपलब्धता के साथ जलवायु प्रमुख रूप से वितरण के प्रतिरूपों का निर्धारण करती है। परिणामस्वरूप उत्तर भारत के मैदानोंडेल्टाओं और तटीय मैदानों में जनसंख्या का अनुपात दक्षिणी और मध्य भारत के राज्यों के आंतरिक जिलोंहिमालयउत्तर-पूर्वी और पश्चिमी कुछ राज्यों की अपेक्षा उच्चतर है।


प्रश्न 2. भारत के किन राज्यों में विशाल ग्रामीण जनसंख्या हैइतनी विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए उत्तरदायी एक कारण को लिखिए।
उत्तर- बिहार और सिक्किम जैसे राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत बहुत अधिक है। गोआ और महाराष्ट्र राज्यों की कुल जनसंख्या का आधे से अधिक भाग गाँवों में बसता है। अंतर-राज्य और अंतः राज्य दोनों स्तरों पर नगरीकरण का सापेक्षिक परिमाण और ग्रामीण नगरीय प्रवास का विस्तार ग्रामीण जनसंख्या के सांद्रण को नियंत्रित करते हैं।


प्रश्न 3. भारत के कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा श्रम सहभागिता ऊँची क्यों है?
उत्तर- भारत जैसे देश के संदर्भ में ऐसा समझा जाता है कि आर्थिक विकास के निम्न स्तरों वाले क्षेत्रों में सहभागिता दर ऊँची है क्योंकि निर्वाह अथवा लगभग निर्वाह की आर्थिक क्रियाओं के निष्पादन के लिए अनेक कामगारों की जरूरत पड़ती है।


प्रश्न 4. “कृषि सेक्टर में भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अंग संलग्न है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- कुल श्रमजीवी जनसंख्या का लगभग 58.2 प्रतिशत कृषक और कृषि मजदूर हैं जबकि केवल 4.2 प्रतिशत श्रमिक घरेलू उद्योगों में लगे हैं और 37.6 प्रतिशत अन्य श्रमिक हैं जो गैर-घरेलू उद्योगोंव्यापारवाणिज्यविनिर्माण और मरम्मत तथा अन्य सेवाओं में कार्यरत हैं।



(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दो।

प्रश्न 1. भारत में जनसंख्या के घनत्व के स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए।
उत्तर- जनसंख्या के घनत्व को प्रति इकाई क्षेत्र में व्यक्तियों की संख्या द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। इससे भूमि के संदर्भ में जनसंख्या के स्थानिक वितरण को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलती है। भारत का जनसंख्या घनत्व 313 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. (2001) है जो एशिया के सघनतम बसे देशों बांग्लादेश (849 व्यक्ति) और जापान (334 व्यक्ति) के बाद तृतीय स्थान पर है। 1951 ई में जनसंख्या का घनत्व 117 व्यक्ति/वर्ग किमी. से बढ़कर 2001 में 313 व्यक्ति/प्रतिवर्ग किमी. होने से विगत 50 वर्षों में 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. की उत्तरोत्तर वृद्धि हुई हैं।

अरुणाचल प्रदेश में कम से कम 13 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से लेकर दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 9340 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. तक है। उत्तरी भारत के राज्यों में केरल (819) और तमिलनाडु (480) में उच्चतर घनत्व पाया जाता है। असम (340), गुजरात (258), आंध्र प्रदेश (275), हरियाणा (477), झारखंड (338), उड़ीसा (236) में मध्यम घनत्व पाया जाता है।

हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय राज्यों में (109) और असम को छोड़कर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में अपेक्षाकृत निम्न घनत्व है जबकि अंडमान और निकोबार द्वीपों को छोड़कर केंद्र-शासित प्रदेशों में जनसंख्या के उच्च घनत्व पाए जाते हैं। (देखें चिख 1.2)। जनसंख्या का घनत्व एक अशोधित माप है। कुल कृषित भूमि पर जनसंख्या के दबाव के संदर्भ में मानव भूमि अनुपात को बेहतर परिज्ञान के लिए कायिक और कृषीय घनत्वों को ज्ञात करना चाहिए जो भारत जैसे विशाल कृषि जनसंख्या वाले देश के लिए सार्थक है।

कायिक घनत्व = कुल जनसंख्या/निवल कृषित क्षेत्र।
कृषीय घनत्व = कुल कृषि जनसंख्या/निवल कृषित क्षेत्र। कृषि जनसंख्या में कृषककृषि मजदूर और उनके परिवार के सदस्य शामिल होते हैं।


प्रश्न 2. भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन का विवरण दीजिए।
उत्तर- भारत की जनसंख्या का व्यावसायिक संघटन जिसका वास्तव में यह अर्थ है कि किसी व्यक्ति के खेतीविनिर्माणव्यापारसेवाओं अथवा किसी भी प्रकार की व्यावसायिक क्रियाओं में लगे होने से द्वितीय और तृतीयक सेक्टरों की तुलना में प्राथमिक सेक्टर के श्रमिकों का अनुपात अधिक है। कुल श्रमजीवी जनसंख्या का लगभग 58.2 प्रतिशत कृषक और कृषि मजदूर है जबकि केवल 4.2 प्रतिशत श्रमिक घरेलू उद्योगों में लगे हैं और 37.6 प्रतिशत अन्य श्रमिक हैं जो गैर-घरेलू उद्योगोंव्यापारविनिर्माण और मरम्मत तथा अन्य सेवाओं में कार्यरत हैं। जहाँ तक देश की पुरुष और स्त्री जनसंख्या के व्यवसाय का प्रश्न है पुरुष श्रमिकों की संख्या स्त्री श्रमिकों की संख्या से तीन सेक्टरों में अधिक है (देंखे चित्र 1.4) और तालिका 1.4)

महिला श्रमिकों की संख्या प्राथमिक सेक्टर में अपेक्षाकृत अधिक है. यद्यपि विगत कुछ वर्षों में महिलाओं की द्वितीयक और तृतीयक सेक्टरों की सहभागिता में सुधार हुआ है। दिखाई दिया है (1991 में 66.85% से 2001 में 58.52%)। परिणामस्वरूपद्वितीयक और तृतीयक सेक्टर में सहभागिता दर बढ़ी है यह श्रमिकों की खेत-आधारित रोजगारों पर निर्भरता से गैर-खेत आधारित रोजगारों पर निर्भरता को इंगित करता है। यह देश की अर्थव्यवस्था में सेक्टरीय स्थानांतरण है।

देश के विभिन्न सेक्टरों में श्रम सहभागिता दर की स्थानिक भिन्नता है। उदाहरण के तौर पर यह जानना आवश्यक है कि पिछले कुछ दशकों में भारत में कृषकों की संख्या बहुत अधिक है। दूसरी ओर आंध्र प्रदेशछत्तीसगढ़उड़ीसाझारखंडपश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कृषि मजदूरों की संख्या अधिक है। दिल्ली चण्डीगढ़ और पांडिचेरी जैसे अत्यधिक नगरीकृत क्षेत्रों में श्रमिकों का बहुत बड़ा अनुपात अन्य सेवाओं में लगा हुआ है। यह न केवल सीमित कृषि भूमि की उपलब्धता को बल्कि बृहत स्तर पर होने वाले नगरीकरण और औद्योगीकरण द्वारा गैर-कृषि सेक्टरों में और अधिक श्रमिकों की आवश्यकता को भी इंगित करता है।

जनसंख्या आंकड़ों के स्रोत:
हमारे देश में जनसंख्या के आँकड़ों को प्रति दस वर्ष बाद होने वाली जनगणना द्वारा एकत्रित किया जाता है। भारत की पहली जनगणना 1872 ई. में हुई थी लेकिन पहली संपूर्ण जनसंख्या 1881 ई. में संपन्न हुई थी।