14. विभाजन को समझना : राजनीति, स्मृति, अनुभव


प्रश्न 1. 1940 के प्रस्ताव के जरिए मुस्लिम लीग ने क्या माँग की?
उत्तर- 1940 के प्रस्ताव के जरिए मुस्लिम लीग की माँग:
उपमहाद्वीप के मुस्लिम-बहुल इलाकों के लिए सीमित स्वायत्तता की माँग करते हुए प्रस्ताव पेश किया। इस अस्पष्ट से प्रस्ताव में कहीं भी विभाजन या पाकिस्तान का उल्लेख नहीं था। इस प्रस्ताव को लिखने वाले पंजाब के प्रधानमंत्री और यूनियनिस्ट पार्टी के नेता सिकन्दर हयात ने मार्च, 1941 को पंजाब असेम्बली को संबोधित करते हुए घोषणा की थी वह ऐसे पाकिस्तान की अवधारणा का विरोध करते हैं जिसमें यहाँ मुस्लिम शासन और शेष स्थानों पर हिंदू राज स्थापित होगा। यदि ऐसा है तो पंजाब के खालसा ऐसे मुस्लिम राज का विरोध करते हैं। उन्होंने संघीय इकाइयों की स्वायत्तता के आधार पर एक ढीले-ढीले (संयुक्त) महासंघ बनाने के अपने विचारों को पुनः दोहराया।


प्रश्न 2. कुछ लोगों को ऐसा क्यों लगता था कि बंटवारा बहुत अचानक हुआ?
उत्तर- 1940 का पाकिस्तान प्रस्ताव अस्पष्ट था परन्तु 1947 में पाकिस्तान के गठन से लोगों को आश्चर्य हुआ। दूसरी जगह जाने वाले लोग सोच रहे थे कि जैसे ही शांति बहाल होगीवे वापस लौट आयेंगे। प्रारंभ में मुस्लिम लीग या स्वयं जिन्ना ने भी पाकिस्तान की सोच को गंभीरता से नहीं उठाया था। द्वितीय विश्व युद्ध के कारण ब्रिटिश सरकार स्वतंत्रता के विषय में चुप थी परन्तु “भारत छोड़ो” आन्दोलन ने उन्हें इस विषय में सोचने के लिए विवश कर दिया।


प्रश्न 3. आम लोग विभाजन को किस तरह देखते थे?
उत्तर- विभाजन के विषय में आम लोग यह सोचते थे कि यह विभाजन स्थायी नहीं होगा अथवा शांति बहाली के पश्चात् सभी लोग अपने मूल स्थान लौट आयेंगे। वे मानते थे कि पाकिस्तान के गठन का मतलब यह कदापि नहीं होगा कि एक देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने वाले लोगों को वीजा और पासपोर्ट की जरूरत पड़ेगी। जो लोग अपने रिश्तेदारोंमित्रों और जानकारों से बिछुड़ जाएंगेवह हमेशा के लिए बिछड़े रहेंगे। जो लोग गंभीर नहीं थे या राष्ट्र विभाजन के गंभीर परिणामों की जाने-अनजाने में अनदेखी कर रहे थेवे यह मानने को तैयार नहीं थे कि दोनों देशों के लोग पूर्णरूप से हमेशा के लिए जुदा हो जायेंगे। आम लोगों का ऐसा सोचना उनके भोलेपन या अज्ञानता और यथार्थ से आँखें बंद कर लेने के समान था।


प्रश्न 4. विभाजन के खिलाफ महात्मा गांधी की दलील क्या थी?
उत्तर- विभाजन के खिलाफ महात्मा गांधी की दलील–

  1. विभाजन के खिलाफ महात्मा गांधी यह दलील देते थे कि विभाजन उनकी लाश पर होगा। ये विभाजन के कट्टर विरोधी थे।
  2. महात्मा गांधी को विश्वास था कि वे देश में धीरे-धीरे साम्प्रदायिक एकता पुनः स्थापित हो जायेगी, इसलिए विभाजन की कोई आवश्यकता नही है।
  3. भारत के लोग घृणा और हिंसा का रास्ता छोड़ देगे और सभी मिलकर दो भाइयों की तरह अपनी सभी समस्याओं का निदान कर लेंगे।
  4. वह यह मानते थे कि अहिंसा, शांति, साम्प्रदायिक भाईचारे के विचारों को हिंदू और मुसलमान दोनों मानते हैं। उन्होंने हर जगह हिंदू और मुसलमानों से शांति बनाये रखने, परस्पर प्रेम और एक-दूसरे की रक्षा करने का अनुरोध किया।
  5. गांधी जी यह स्वीकार करते थे कि सैंकड़ों साल से हिंदू, मुस्लिम इकट्ठे रहते आ रहे हैं। वे. एक जैसी वेशभूषा धारण करते हैं, एक जैसा भोजन खाते हैं, इसलिए शीघ्र ही आपसी घृणा भूल जायेंगे और वे पहले की तरह एक-दूसरे के दुःख-सुख में हिस्सा लेंगे।

प्रश्न 5. विभाजन को दक्षिण एशिया के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ क्यों माना जाता है?
उत्तर- विभाजन: दक्षिण एशिया के इतिहास का एक ऐतिहासिक मोड़–

  1. विभाजन तो इससे पहले भी हुए परन्तु यह विभाजन इतना व्यापक हिंसात्मक था कि दक्षिण एशिया के इतिहास में इसे एक नए ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा गया।
  2. विभाजन के दौरान हिंसा अनेक बार हुई। दोनों सम्प्रदायों के नेता इतने भयंकार दुष्परिणामों की आशा भी नहीं कर सकते थे।
  3. इस विभाजन के दौरान भड़के साम्प्रदायिक दंगों के कारण लाखों लोग मारे गये और नये सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करने के लिए विवश हुए।

प्रश्न 6. ब्रिटिश भारत का बँटवारा क्यों किया गया?
उत्तर- ब्रिटिश भारत के बँटवारे के कारण:
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अगस्त, 1947 ई. ‘को भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति’ विश्व इतिहास की एक उल्लेखनीय घटना है। अंग्रेजों ने भारत को स्वतंत्र तो कर दियापर उसे दुर्बल बनाने के लिए उसे दो भागों-भारत और पाकिस्तान में विभाजित कर दिया। गांधी जी भारत का विभाजन बिल्कुल नहीं चाहते थे। देश का विभाजन होने के प्रमुख कारण इस प्रकार थे:
1. अंग्रेजों का षड्यंत्र:
भारत का विभाजन अंग्रेजों के षड्यंत्र का परिणाम था। उन्होंने भारत को दुर्बल बनाये रखने के लिए इसका विभाजन किया। 1942 ई. के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से अंग्रेज जान गए थे कि उन्हें भारत छोड़ना ही है। उन्होंने योजना बना ली कि यदि भारत को स्वतंत्र करना ही है तो उसे विभाजित कर दिया जाये।

2. मुस्लिम लीग की स्थापना:
अंग्रेजों से प्रेरणा तथा संरक्षण पाकर मुसलमानों ने अपने हितों की रक्षा के लिए 1906 ई. में मुस्लिम लीग की स्थापना की। अपने हितों के लिए अंग्रेजों के भक्त बने रहे। अंग्रेजों द्वारा मार्ले-मिण्टो सुधारों में मुसलमानों को अलग से प्रतिनिधि चुनने का अधिकार देकर साम्प्रदायिकता का विकास किया।

3. कांग्रेस की दुर्बल नीति:
कांग्रेस ने लीग को प्रसन्न करने के लिए उसकी अनुचित बातों को मानकर उसे बढ़ावा दे दिया। 1916 ई. में कांग्रेस ने लखनऊ समझौते के अनुसार मुसलमानों के अलग प्रतिनिधित्व को स्वीकार करके भारत में सम्प्रदायवाद को स्वीकार कर लिया। इसके बाद खिलाफत आन्दोलन को असहयोग आन्दोलन में शामिल करना और सी. आर. योजना में लीग को अधिक रियायतें देना कांग्रेस की दुर्बल नीति के परिणाम थे। इससे जिन्ना को विश्वास हो गया कि कांग्रेस उसकी माँग का विरोध नहीं करेगी। यही कारण था कि उसने पाकिस्तान की मांग की।

4. अंतरिम सरकार की असफलता:
अंतरिम सरकार में कांग्रेस का बहुमत था लेकिन लीग उसके प्रत्येक काम में बाधा डालती थी। इससे देश में रचनात्मक कार्यों की अपेक्षा रक्तपात और दंगों को बढ़ावा मिला। अंतरिम सरकार की असफलता से यह स्पष्ट हो गया कि कांगेस और मुस्लिम लीग मिल कर कार्य नहीं कर सकते। कहीं गृहयुद्ध न छिड़ जाये इसलिए एक आवश्यक बुराई के रूप में गांधी जी तथा अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने विभाजन को स्वीकार कर लिया।

5. हिंदू-मुस्लिम दंगे:
अंग्रेजों से बढ़ावा पाकर मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग को पूरा करवाने के लिए देश भर में हिंदू-मुस्लिम दंगे करवाये। बंगाल और पंजाब में तैमूर और नादिरशाह के अत्याचारों की याद एक बार फिर से ताजा हो गयी। फिर से राष्ट्रीय नेताओं ने लाखों बेकसूर लोगों का खून बहाने की बजाय मुस्लिम लीग की मांग की।


प्रश्न 7. बंटवारे के समय औरतों के क्या अनुभव रहे?
उत्तर- बंटवारे के समय औरतों के अनुभव–

  1. बंटवारे के दौरान औरतों को अनेक दर्दनाक कष्टों का सामना करना पड़ा । अनेक विद्वानों और इतिहासकारों ने इस दर्द को महसूस किया। अनेक औरतों का बलात्कार हुआ, उन्हें अगवा किया गया और उन्हें बार-बार बेचा-खरीदा गया।
  2. औरतें अजनबियों के साथ जिंदगी गुजारने के लिए विवश की गई। इससे कुछ नये पारिवारिक संबंध विकसित किये गये। भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने इन्सानी संबंधों की और बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया।
  3. अनेक औरतों को नये परिवार से निकाल कर पुराने परिवारों में भेजने का निश्चय किया गया। इस संबंध में उनसे कोई सलाह नहीं ली गई और उनके अधिकारों का तिरस्कार किया गया । लगभग 30 हजार औरतों को बरामद किया गया और उन्हें भारत या पाकिस्तान भेजा गया।
  4. कई औरतों ने उस हिंसा भरे वातावरण में अपनी इज्जत की रक्षा के लिए अथक परन्तु निष्फल प्रयास किये।
  5. पुरुष अपनी बीवी, बेटी तथा बहन को अपने शत्रु के नापाक इरादों से बचाने के लिए उनकी हत्या कर देता था। खालसा गाँव की घटना इसका उदाहरण है जिसमें 90 औरतों ने कुएँ में कूदकर अपनी जान दे दी।
  6. संभवतः पुरुष भी औरतों को ऐसा करने के लिए उकसाते थे। प्रतिवर्ष 13 मार्च को इसे शहादत के रूप में मनाया जाता है और इससे सिक्ख औरतें प्रेरणा प्राप्त करती है।

प्रश्न 8. बंटवारे के सवाल पर कांग्रेस की सोच कैसे बदली?
उत्तर- 1. गाँधी जी सहित अनेक कांग्रेस के नेता मुस्लिम लीग को उसकी राष्ट्र विभाजन की मांग छोड़ने के लिए राजी करने में विफल रहे।

2. मुस्लिम लीग ने अधिक मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों को पाकिस्तान के लिए मांगकर कुछ कांग्रेसयिों के दिमाग में यह विचार उत्पन्न कर दिया कि शायद कुछ समय बाद गाँधी जी देश की एकता को पुनः स्थापित करने में कामयाब हो जायेंगे परन्तु ऐसा नहीं हुआ।

3. कुछ कांग्रेसी नेता सत्ता के प्रति ज्यादा लालायित थे। वे चाहते थे कि चाहे देश का विभाजन हो लेकिन अंग्रेज चले जाएँ और उन्हें सत्ता तुरंत मिल जाये।

4. मुस्लिम लीग के द्वारा प्रत्यक्ष कार्यवाही करने की धमकी और बंगाल में उसके द्वारा बड़े पैमाने पर साम्प्रदायिक दंगे भड़कानाहिंदू महासभा जैसे साम्प्रदायिक दल के द्वारा हिंदू राष्ट्र को उठाना और कुछ अंग्रेज अधिकारियों द्वारा यह घोषित कर देना कि यदि लीग और कांग्रेस किसी निर्णय पर नहीं पहुंचेंगे तो भी अंग्रेज भारत को छोड़कर चले जायेंगे। कांग्रेस जानती थी कि 90 वर्ष बीतने के बाद भी अंग्रेज अपनी महिलाओंबच्चों आदि के लिए वे खतरे नहीं उठाना चाहते थे जो उन्होंने 1857 के विद्रोह के दौरान अनुभव किये थे।

5. मुस्लिम लीग की अन्य कई कार्यवाहियों ने कांग्रेस की सोच को बदल डाला। 1946 के चुनाव में जिन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी बहुल थी वहाँ मुस्लिम लीग की सफलतामुस्लिम लीग के द्वारा संविधान सभा का बहिष्कार करनाअंतरिम सरकार में शामिल न करना और जिन्ना के दोहरे राष्ट्र सिद्धांत पर बार-बार बल देना कांग्रेस की मानसिकता पर राष्ट्र विभाजन समर्थक निर्णय बनाने में सहायक रही।


प्रश्न 9. मौखिक इतिहास के फायदे/नुकसानों की पड़ताल कीजिए। मौखिक इतिहास की पद्धतियों से विभाजन के बारे में हमारी समझ को किस तरह विस्तार मिलता है?
उत्तर- मौखिक इतिहास के फायदे/नुकसान एवं मौखिक इतिहास की पद्धतियों से विभाजन के बारे में समझ का विस्तार–
1. 
मौखिक वृत्तांतसंस्करणडायरियाँपारिवारिक इतिहास और स्वलिखित ब्यौरों से तकसीम (बंटवारा) के दौरान आम लोगों की कठिनाइयों और मुसीबतों को समझने में सहायता मिलती है।

2. लाखों लोग बंटवारे की पीड़ा तथा एक मुश्किल दौर को चुनौती के रूप में देखते हैं।

3. भारत का विभाजन अगस्त, 1947 में हुआ। लाखो लोगों ने बंटवारे की पीड़ा और उसके अश्वेत (काले) दौर को देखा। उनके लिए यह केवल संवैधानिक विभाजन या राजनैतिक पार्टियों की दलगत राजनीति का मामला नहीं था। मौखिक इतिहास की गवाही देने वाले और सुनने वाले लोगों के लिए यह बदलाव का ऐसा वक्त था जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।

4. 1946 से 1950 तक और उसके बाद भी जारी रहने वाले इन परिवर्तनों से निपटने के लिए इतिहासकारों को मनोवैज्ञानिकभावनात्मक और सामाजिक समायोजन की आवश्यकता थी। यूरोपीय महाध्वंस की भाति देश के विभाजन को एक राजनैतिक घटना के रूप में नहीं देखना चाहिए अपितु इसकी पीड़ा को झेलने वाले लोगों के अनुभवों का प्रेक्षण और अध्ययन भी करना चाहिए। किसी घटना की वास्तविकता को स्मृतियों और अनुभव से भी आकार प्राप्त होता है।

5. मौखिक स्रोतों में व्यक्तिगत स्मृतियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। इसकी विशेषता यह है कि उनसे अनुभवों और स्मृतियों को और बारीकी से समझने का मौका मिलता है। इससे इतिहासकारों को बंटवारे जैसी घटनाओं के दौरान लोगों के साथ क्या-क्या हुआइस बारे में बहुरंगी और सजीव वृत्तांत लिखने की योग्यता मिलती है।

6. मौखिक विवरण अपने-आप नहीं मिलते। उन्हें साक्षात्कार के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। साक्षात्कार में भी लोगों के दर्दअहसास और सूझबूझ से काम लेना पड़ता है। यहाँ यह भी मुश्किल आती है कि सभी लोग आपबीती सुनाने के लिए तैयार नहीं होते। उदाहरण के लिए यदि किसी औरत का बलात्कार हुआ है तो इस बारे में वह अपना मुँह कैसे खोल सकती है। ऐसी पीड़ित महिला के साथ सघन और उपयोगी जानकारी प्राप्त करने के लिए आत्मीय संबंध विकसित करना होगा। इसके अलावा याददाश्त की समस्या आती है। मौखिक इतिहासकारों को विभाजन के वास्तविक अनुभवों की बनावटी यादों के जाल से बाहर निकालने के लिए चुनौतीपूर्ण काम भी करना पड़ता है।


प्रश्न 10. दक्षिण एशिया के नक्शे पर कैबिनेट मिशन प्रस्तावों में उल्लिखित भाग कख और ग को चिन्हित कीजिए। यह नक्शा मौजूदा दक्षिण एशिया के राजनैतिक नक्शे से किस तरह अलग है?
उत्तर-
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प्रश्न 11. यूगोस्लाविया के विभाजन को जन्म देने वाली नृजातीय हिंसा के बारे में पता लगाइए। उसमें आप जिन नतीजों पर पहुँचते हैंउनकी तुलना इस अध्याय में भारत विभाजन के बारे में बताई गई बातों से कीजिए।
उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें।


प्रश्न 12. पता लगाइए कि क्या आपके शहरकस्बेगाँव या आसपास के किसी स्थान पर दूर से कोई समुदाय आकर बसा है (हो सकता है आपके इलाके में बंटवारे के समय आए लोग भी रहते हों)। ऐसे समुदायों के लोगों से बात कीजिए और अपने निष्कर्षों को एक रिपोर्ट में संकलित कीजिए। लोगों से पूछिए कि वे कहाँ से आए हैंउन्हें अपनी जगह क्यों छोड़नी पड़ी और उससे पहले व बाद में उनके कैसे अनुभव रहे। यह भी पता लगाइए कि उनके आने से क्या बदलाव पैदा हुए।
उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें।